प्यासे ईसा

ईसा भक्ति निष्ठा और श्रद्धा के प्यासे हैं

प्रकाशित 13/05/2023


अपराध से मुक्ति धार्मिक प्रक्रिया के तहत प्राप्त की जाती है जैसा कि भले डाकू ने और उड़ाऊ पुत्र ने हासिल किया है; जिसकी चर्चा मैं निरंतर कर रहा हूं। फिर भी सबसे अच्छा यह होता की मनुष्य अपराध ही नहीं करता। क्या यह संभव है? जरूर यह मुश्किल है, किंतु असंभव नहीं है। जैसा कि लिखा है -


भक्ति और निष्ठा से पाप का प्रायश्चित होता है।
प्रभु पर श्रद्धा द्वारा मनुष्य बुराई से दूर रहता है। सुकि्त ग्रंथ 16 : 6


प्रभु पर सदा श्रद्धा को समझने के लिए यह समझना जरूरी है कि इस विषय में ईसा मसीह की शिक्षा क्या है :


ईसा ने उससे कहा, "अपने प्रभु ईश्वर को अपने सारे हृदय, अपनी सारी आत्मा और अपनी सारी बुद्धि से प्यार करो। यह सबसे बड़ी और पहली आज्ञा है। दूसरी आज्ञा इसी के सदृश्य है- अपने पड़ोसी को अपने समान प्यार करो। इन्हीं दो आज्ञाओं पर समस्त संहिता और नबियों की शिक्षा अवलंबित है।" संत मत्ती 22 : 37-40


ईसा मसीह उपरोक्त दोनो आज्ञाओं में कुछ नया नहीं कह रहे हैं, बल्कि वही कह रहे हैं जो पिता ईश्वर की 10 आज्ञाओं की पाटी में लिखा है और जिसे सीनाई पर्वत पर मूसा नबी को संहिता के रूप में सौंपा गया था। ईसा मसीह की दोनों आज्ञाओं में और सिनाई पर्वत पर मूसा नबी को दी गई पिता परमेश्वर की 10 आज्ञाओं में कोई मतभेद नहीं है- ये बिल्कुल समान है; जिसकी चर्चा में आगे के लेखों में इस मकसद से करूंगा कि ईसा मसीह और पिता परमेश्वर की 10 आज्ञाओं को समझने पर हम अपराध करने की अपनी प्रवृत्ति पर विजय पा सकेंगे। एक नजरिया से देखिएगा तो यह समझ में आएगा कि पिता परमेश्वर एकमात्र ईश्वर है और ईसा मसीह भी एकमात्र ईश्वर है; इसलिए दोनों अलग-अलग बातें नहीं कर सकते हैं और उनकी बातों में मतभेद नहीं हो सकती है। यही कारण है कि मूसा नबी को सौंपी गई 10 आदेशों में और ईसा मसीह की उपरोक्त दोनों आदशों में समानता ही समानता है।


पिता ईश्वर का आदेश पालन हमारी उनके प्रति हमारी भक्ति निष्ठा और श्रद्धा का प्रतीक है।


क्योंकि


मैं प्यासा हूं। संत योहन 19 : 28 वचनांश


ईसा मसीह हमारे भक्ति निष्ठा और श्रद्धा के प्यासे हैं।


आमीन।


ईश्वर की महिमा में जारी.....


ईश्वर की महिमा हो, ईश्वर को धन्यवाद।


"न-अधर्म" ही धर्म है।"


झारखण्ड! तुम्हें शांति मिले!!

भारत! तुम्हें शांति मिले!!

संपूर्ण विश्व को शांति!!