प्रकाशित 08/05/2023
ईसा मसीह यरूशलेम में प्रवेश करने के लिए गधे की सवारी को चुना! उन्होंने दूसरा कोई तेज तरार जानवर क्यों नहीं चुना? इसलिए कि वे यरूशलेम को उनके स्वागत में पूरी तरह से तैयार, मन दिल से तैयार होने के लिए समय देना चाहते थे। सोचिए! कि कोई दूसरा जानवर होता, तो वे समय से पहले यरूशलेम में प्रवेश कर जाते, तो उनका भव्य स्वागत जैसा हुआ, वैसा नहीं हो पाता।
आज ईसा हमारे हृदय रूपी यरूशलेम में प्रवेश करना चाहते हैं। वे आप और हमें, उनके जोरदार स्वागत की तैयारी के लिए समय देने के लिए धीमी सवारी, गधे की सवारी कर रहे हैं। क्योंकि पवित्रता और पवित्रता का कोई मिलन नहीं होता। सत्य और असत्य कभी मिल नहीं सकते। क्या हम उनका पुरजोर स्वागत करने के लिए अपने हृदय को तैयार कर रहे हैं?
2023 साल पहले उन्होंने जोरदार तैयारी के साथ उनका स्वागत करने के बाद उन्हें पकड़वा दिया; क्योंकि जरूर उन्होंने डालियां और चादर बिछाकर प्रभु का स्वागत किया; लेकिन उनके यरूशलेम रुपी दिल की तैयारी अधूरी रह गई। उन्होंने जरूर चादर, डालियां और मुंह से जायकार कर उनका स्वागत किया, लेकिन उन्होंने अपने हृदय के पापों को, अपने मन और दिल को उनके द्वारा धो दिए जाने के लिए उनके रास्ते पर नहीं की बिछाया। उन्होंने ईसा मसीह का स्वागत मुंह भर से किया; मन और दिल से नहीं!
आज वही ईसा मसीह हमारे हृदय रूपी यरूशलेम में आना चाहते हैं। हम ना तो उस जमाने उनके चेले हैं, ना तो उस जमाने के अमीर है और ना ही उस जमाने के गरीब हैं कि हम चादर और डालिया बिछाकर उनका स्वागत करें। हम तो आधुनिक युग के आधुनिक अपराधी / पापी हैं। हमारे पास उनके रास्ते पर बिछाने के लिए सिर्फ और सिर्फ पापी मन और कुंठित दिल है।
इसलिए आइये उस गाने में हम एक पद और जोड़े ---
ओ मेरे प्रभु यरूशलेम को गए – 2
१. आगे पीछे चेलों ने – 2, जय-जय उनकी पुकारी – 2
२. धनी लोगों ने – 2, कपड़े मार्ग में बिछाए – 2
३. गरीब लोगों ने – 2, डालियां तोड़ कर बिछाईं – 2
और
४. हम लोगों ने – 2, मन को राह में बिछाए, दिल को राह में बिछाए।
ओ मेरे प्रभु यरूशलेम को गए – 2
मैं द्वार के सामने खड़ा होकर खटखटाता हूं। यदि कोई मेरी वाणी सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके यहां जाकर उसके साथ भोजन करूंगा और वह मेरे साथ प्रकाशना-ग्रंथ 3 : 20
क्योंकि
मैं प्यासा हूं। संत योहन 19 : 28 वचनांश
ईसा मसीह हमारे दिलेरी और सच्चे स्वागत के प्यासे हैं।
आमीन।
ईश्वर की महिमा में जारी.....
ईश्वर की महिमा हो, ईश्वर को धन्यवाद।
"न-अधर्म" ही धर्म है।"
झारखण्ड! तुम्हें शांति मिले!!
भारत! तुम्हें शांति मिले!!
संपूर्ण विश्व को शांति!!