प्रकाशित 16/04/2020
ईसा मसीह को उनके अपनों ने पकड़वाया और उनके अपने उनको छोड़ कर भाग गए।
तब सभी शिष्य ईसा को छोड़ कर भाग गए। संत मरकुस 14 : 19
ईसा मसीह को छोड़ना, तो प्रेम को छोड़ना है; और प्रेम को छोड़ना तो प्रेम को तकलीफ़ देना है अथवा कहिए कि प्रेम के विरूद्ध भारी पाप करना है। अर्थात, ईसा मसीह को काठ के क्रूस का बोझ देने से पहले ही शिष्यों का अपने गुरु को छोड़ कर उनके कांधे पर पाप (क्रूस) का बोझ लाद दिया। ईसा मसीह ईश्वर हैं और हम मनुष्यों के नस-नस से वाकिफ हैं। वे बिल्कुल ठीक से जानते हैं कि उनको अर्थात प्रेम को किसने कब त्यागा और भविष्य में कौन कब-कब अपनी संसारिक उपलब्धियों के कारण त्यागेगा। यही कारण है कि उन्होंने पेत्रुस से कहा था
आज, इसी रात को मुर्गे के दो बार बांग देने से पहले ही तुम मुझे तीन बार अस्वीकार करोगे। संत मरकुस 14 : 30 वचनांश
क्या ईसा मसीह ऐसा चाहते हैं कि लोग उन्हें (प्रेम को) त्याग दें? नहीं! बिल्कुल भी नहीं! लेकिन वे हम मनुष्य की सांसारिक अभिलाषाओं, कामनाओं एवं वासनाओं के संपूर्ण ज्ञाता हैं। वे जानते थे कि उनके सबसे नजदीकी, पेत्रुस भी उनको इस रात त्याग देगा। ऐसा बताकर उन्होंने एक तरह से यह ऐलान कर दिया है कि हम मनुष्यों को प्रेम को किसी भी कीमत पर नहीं त्यागना चाहिए; क्योंकि जब भी किसी ने प्रेम को त्यागा है, प्रेम दूखित और ईसा क्रूसित हुए हैं। यही कारण है कि मुर्गे के दो बार बांग देते ही पेत्रुस को एहसास हुआ कि उसने क्रूस के काठ से पहले ही ईसा को तीन दफा क्रूसित कर चुका है; और अपनी करनी पर वह फूट-फूट कर रोने लगा और ऐसा कर वह ईसा मसीह के कांधे पर से अपने पाप का बोझ कम करने लगा
और प्रभु ने मुड़कर पेत्रुस की ओर देखा। तब पेत्रुस को याद आया कि प्रभु ने उससे कहा था कि आज मुर्गे के बांग देने से पहले ही तुम मुझे तीन बार स्वीकार करोगे, और वह बाहर निकल कर फूट-फूट कर रोया। संत लूकस 22 : 61
हमने तो न जाने कितनी बार अपने निज स्वामी को अपने सृष्टि कर्ता को अपने मसीह को त्याग दिया है। इस जीवन में कितनी बार मुर्गों ने बांग दिया, पर शायद हमारे पापों की नींद टूटी नहीं है। प्रभु हमारी तरफ मुड़ कर ठीक वैसे ही देख रहें हैं, जैसा कि उन्होंने पेत्रुस की ओर देखा। वे चाहते हैं कि हम उनके कांधे पर से अपने पापों का भार फूट-फूट कर रो कर अर्थात पेत्रुस की तरह सच्चे पश्चताप के द्वारा हटाएं।
क्योंकि
मैं प्यासा हूं। संत योहन 19 : 28 वचनांश
ईसा अपनो के बेहद प्यासे हैं!!
आमीन।
ईश्वर की महिमा में जारी.....
ईश्वर की महिमा हो, ईश्वर को धन्यवाद।
"न-अधर्म" ही धर्म है।"
झारखण्ड! तुम्हें शांति मिले!!
भारत! तुम्हें शांति मिले!!
संपूर्ण विश्व को शांति!!