प्रकाशित 07/03/2023
कलवारी की राह (क्रूस रास्ता) में ईसा मसीह पर बहुत सारे डाकू अपनी उद्दंडता का प्रदर्शन कर रहे थे। उन डाकूओं की भीड़ में से एक ऐसे डाकू की चर्चा है जिसने ईसा मसीह का दिल जीत लिया; इसलिए ईसा मसीह ने उससे कहा था -
उन्होंने उससे कहा, "मैं तुमसे यह कहता हूं, तुम आज ही परलोक में मेरे साथ होगे"। संत लूकस 23 : 43
इसकी चर्चा जरूरी है कि वह डाकू ईसा मसीह का दिल जीतने में सफल कैसे हुआ!!! जरूर
- वह डाकू था, बुरा था, लेकिन उस दिन वह उद्दंडता का प्रदर्शन नहीं कर रहा था, बल्कि अपने जीवन भर की उद्दंडता के लिए भावविभोर हो रहा था।
- वह ईसा मसीह पर अत्याचार होते हुए देखकर सोच रहा था- हाय मैं भी तो लोगों पर ऐसे ही अत्याचार करता था।
- वह डाकुओं को ईसा मसीह को लात मारते हुए देखते हुए सोच रहा था- हाय मैं भी तो लोगों को ऐसे ही लाथ मारता था!!
- वह डाकूओं को ईसा मसीह को भद्दी गालियां देते हुए सुनकर सोच रहा था- हाय मैं भी तो ऐसे ही भद्दी गालियां लोगों को दिया करता था!!
- वह डाकूओं को ईसा मसीह को पर थूकते हुए देख कर सोच रहा था- हाय मैं भी तो ऐसे ही लोगों पर थूका करता था!!
इत्यादि इत्यादि।
इसका का अर्थ है कि वह डाकू अन्य डाकूओं की तरह ईसा मसीह पर क्रूस (पापों का बोझ) लादना छोड़, आज अपने द्वारा निर्मित क्रूस चुन-चुन कर ईसा मसीह के कंधे पर से हटा रहा था। वह आज सचमुच में क्रूस रास्ता कर रहा था। वह आज अनन्या डाकूओं की संगति छोड़कर सचमुच में ईसा मसीह के साथ क्रूस रास्ता करते हुए अपने पापों को पहचान पा रहा था। वह आज अपने पापों का त्याग कर, अपने पाप करने की प्रवृत्ति पर पूर्ण विराम लगाकर, अपनी करनी पर भावविह्वल था। वह आज ईसा मसीह के साथ क्रूस रास्ता करते हुए, अपने पापों को पहचानते हुए, एक पश्चातापी-पापी बन रहा था; जिसके लिए स्वर्ग के दूत और संत आनंद मनाते हैं। वह आज अपना क्रूस उठाकर ईसा मसीह का अनुसरण कर रहा था। वह ईसा मसीह के वचन को पूरा कर रहा था -
जो मेरा अनुसरण करना चाहता है, वह आत्मत्याग करें और अपना क्रूस उठाकर मेरे पीछे हो ले; संत मत्ती 16 : 24
वह आज ईसा मसीह के कांधे पर से अपना क्रूस उठाकर एक पश्चातापी-पापी बनकर, सुंदर पापस्वीकार की तैयारी किया है। इसलिए वह क्रूस पर टंगे ईसा मसीह के समक्ष सुंदर पापस्वीकार करते हुए कह पा रहा है कि इसने कोई पाप नहीं किया है, बल्कि हम पापी है।
हमें भी उसी एक डाकू की तरह, डाकूओं की संगति छोड़कर अर्थात अपने पाप करने की प्रवृत्ति पर पूर्ण विराम लगाकर इसी प्रकार से पापस्वीकार की तैयारी करनी चाहिए।
जो मेरा अनुसरण करना चाहता है, वह आत्मत्याग करें और अपना क्रूस उठाकर मेरे पीछे हो ले; संत मत्ती 16 : 24
आमीन।
ईश्वर की महिमा में जारी.....
ईश्वर की महिमा हो, ईश्वर को धन्यवाद।
आमीन।
"न अधर्म" ही धर्म है।"
झारखण्ड! तुम्हें शांति मिले!!
भारत! तुम्हें शांति मिले!!
संपूर्ण विश्व को शांति!!