प्रकाशित 06/04/2023
क्रूस नये व्यवस्थान की बात लगती है, लेकिन बताना जरूरी है कि इसका निर्माण और रोकथाम का जिक्र पूराने व्यवस्थान में भी मिलता है। मैंने जिक्र किया है कि जब-जब ईश्वर की पवित्र इच्छा, मानवजाति की अपवित्र इच्छा के द्वारा काटी जाती है, क्रूस (पाप) का निर्माण होता है। मानवजाति ने क्रूस का निर्माण तो अदन वाटिका से शुरू किया। हालांकि ईश्वर ने क्रूस निर्माण नहीं करने का आदेश स्वयं एवं अपने नबियों के माध्यम से निरंतर देते रहे हैं -
प्रभु-ईश्वर ने मनुष्य को यह आदेश दिया, "तुम वाटिका के सभी बृक्षों के फल खा सकते हो, किंतु भले-बुरे के ज्ञान के वृक्ष का फल नहीं खाना; क्योंकि जिस दिन तुम उसका फल खाओगे तुम अवश्य मर जाओगे"। उत्पत्ति ग्रंथ 2 : 16-17
तो यह स्पष्ट है कि क्रूस (पाप) के निर्माण से त्रित्वामय ईश्वर को तकलीफ़ जरुर होता है; लेकिन उसके वजन से मौत उसके निर्माता (मनुष्य) की होती है!!!!
इसलिए ईश्वर ने सीनई का विधान और दस आज्ञाएं मूसा नबी के द्वारा प्रस्तुत किया क्योंकि वे जिन्हें अपने सदृश्य गढ़ते हैं, पाप (क्रूस) के बोझ तले उनकी मृत्यु नहीं देखना चाहते हैं।
इसलिए पहला है, आदेशपालन; और दूसरा है, आदेशभंग की दशा में पश्चतापी-पापी बनकर घर वापसी की तैयारी क्योंकि दयासागर ईश्वर क्षमा देने को तत्पर हैं-
प्रभु करता है : आओ, हम एक साथ विचार करें। तुम्हारे पाप सिंदूर की तरह लाल क्यों ना हों, वे हिम की तरह उज्जवल हो जाएंगे; वे किरमीज की तरह मटमैला क्यों न हो, वे उनकी तरह श्वेत हो जाएंगे। नबी इसायाह का ग्रंथ 1 : 18
यह ईश्वर की मानवजाति को उसके पाप धो देने की और मानव के प्रति ईश्वर के अनन्य प्रेम को दर्शाता है। क्या मनुष्य ईश्वर के इस अपार प्रेम का दर्शन कर पाया है? ईश्वर के इसी अपार प्रेम का दृश्य पिछली व्यारी के कमरे में दिखाई पड़ा-- जब ईसा मसीह भोजन के बीच से उठ कर अपने शिष्यों के पैर धोने लगे। जानते हैं क्यों? क्योंकि शिष्य मैले थे। आध्यात्मिक भोज में सहभागी होने लायक नहीं थे!! अपनी शरीर की वासनाओं के कारण वे मैले थे। पेत्रुस इस धुलाई के कारणों से अनभिज्ञ है और धुलाई से मना कर रहा है क्योंकि उसकी सोच है कि उसके गुरु उसका पैर कैसे धो सकते हैं!!!!
पेत्रुस ने कहा, "मैं आप को अपने पैर कभी नहीं होने दूंगा"। ईसा ने उस से कहा, "यदि मैं तुम्हारे पैर नहीं धोऊंगा, तो तुम्हारा मेरे साथ कोई संबंध नहीं रह जाएगा।" संत योहन 13 : 8
क्या सत्य और असत्य का मेल हो सकता है?
क्या अच्छा और बुरा का मेल हो सकता है?
क्या दया और कठोर का मेल हो सकता है?
क्या झूठ और सच का मेल हो सकता है?
…....................... इत्यादि इत्यादि
तो फिर पापी का, ईसा के साथ मेल कैसे हो सकता है? पापी शरीर में ईसा के पवित्र शरीर को ग्रहण कैसे किया जा सकता है? यदि ग्रहण कर भी लिया जाए, तो क्या उन दोनों का संबंध स्थापित हो सकता है?
यही कारण है कि ईसा मसीह ने सिर्फ पेत्रुस से ही नहीं, बल्कि सारे मानवजाति से पिछली व्यारी के कमरे से संदेश दिए हैं कि यदि मैं तुम्हें शुद्ध ना करूं तो तुम अशुद्ध रह जाओगे; अशुद्ध से मैं किसी प्रकार का मेल-जोल, संबंध नहीं करता।
वे हमें धोकर शुद्ध कर देना चाहते हैं; क्या हम शुद्ध होना चाहते हैं? क्रूस ढोने से पहले, पिछली व्यारी के कमरे में ईसा मसीह ने क्रूस के वजन को संजीवनी जल से धो कर कम करने का प्रयास किया है। क्या हम अपने अपराधों की धुलाई के लिए तैयार हैं?
यदि मैं तुम्हारे पैर नहीं धोऊंगा, तो तुम्हारा मेरे साथ कोई संबंध नहीं रह जाएगा।" संत योहन 13 : 8
यदि ईसा मसीह से संबंध बनाना है, तो अपना क्रूस (पाप) का बोझ के साथ उनके पास जाना ही पड़ेगा। नहीं तो हम प्रभु भोज लेते रहेंगे, लेकिन उनके साथ संबंध नहीं बना पायेंगे; प्रभु, भोज के रुप में हमारे पास आयेंगे और हमारे गंदगी के कारण तुरंत चले भी जाएंगे क्योंकि पवित्रता और अपवित्रता का कोई संबंध नहीं हो सकता है। आज भी प्रभु संजीवन जल लिए हमें धोने को तैयार हैं! क्या हम अपना क्रूस (पाप) का बोझ उठा कर उनके पास जाने को तैयार हैं?
जो मेरा अनुसरण करना चाहता है, वह आत्मत्याग करें और अपना क्रूस उठाकर मेरे पीछे हो ले; संत मत्ती 16 : 24
आईए! हम अपने क्रूस (पाप) का बोझ उठा कर ईसा मसीह के पास पहुंच कर उनके द्वारा इन बोझ से मुक्ति पाएं।
आमीन।
ईश्वर की महिमा में जारी.....
ईश्वर की महिमा हो, ईश्वर को धन्यवाद।
आमीन।
"न अधर्म" ही धर्म है।"
झारखण्ड! तुम्हें शांति मिले!!
भारत! तुम्हें शांति मिले!!
संपूर्ण विश्व को शांति!!