प्रकाशित 02/04/2023 - 04/04/2023
02/04/2023
जब ईसा मसीह कलवरी की राह में पहली दफा गिरे, तो वे हमारे, आपके और सारी मानवजाति की पहली पहली बार की गई पाप के बोझ से दब गए। इसलिए *संसार की जितनी आबादी, क्रूस उतना ही भारी।* पहली बार गिर कर उन्होंने सारी मानवजाति को उनके पहली पाप से मुक्त करने का न्योता दे रहे हैं - क्या हम अपनी पहली गलती के लिए माफी मांग कर ईसा का बोझ हल्का कर उन्हें उठने मदद करेंगे?
बहुत सारे लोग अपनी पहली पाप के लिए उस पश्चातापी-डाकू के समान पश्चाताप कर ईसा के उपर से अपने पहले पाप के बोझ (क्रूस) को हटा कर उन्हें उठने में मदद कर रहे हैं और ईसा बड़ी मशक्कत से उठ कर निर्धारित गंतव्य की ओर बढ़ने लगे। जैसे-जैसे ईसा गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं, क्रूस के काठ वजन तो सि्थर है, लेकिन लोगों के भारी कोलाहल (लाथ-जूते, धक्का-मुक्की, गाली-गलौज, बुरे विचार और उन विचारों की करनी, ईष्य-दवेष, घृणा, मार-पीट, क्रोध............) के कारण ईसा के कांधे का बोझ निरंतर ही बढ़ता जा रहा है। यही कारण है कि ईसा दूसरी बार कलवरी के राह पर गिर पड़े हैं और हमसे कहते हैं -
जो मेरा अनुसरण करना चाहता है, वह आत्मत्याग करें और अपना क्रूस उठाकर मेरे पीछे हो ले; संत मत्ती 16 : 24
तो जायज सवाल यह है कि हम कौन-सा अपने क्रूस (पाप का बोझ) को उठा कर उस पश्चातापी-डाकू की तरह उसका अनुसरण करें? इस सवाल का जवाब पाने के लिए यह समझना जरूरी है कि ईसा जब दूसरी बार क्रूस के नीचे गिर कर भारी बोझ से दबे हुए हैं, तो उस वक्त क्रूस वजन कितना है!!! यह जानना इसलिए भी जरूरी है ताकि हम दूसरी बार भारी क्रूस के बोझ से लड़खड़ा कर गिरे हुए ईसा को उठ कर मानवजाति की मुक्ति में कलवरी की राह में आगे बढ़ने में मदद कर उनके मुक्ति कार्य में सहभागी हों सकें क्योंकि ईसा का न्योता हैं -
जो मेरा अनुसरण करना चाहता है, वह आत्मत्याग करें और अपना क्रूस उठाकर मेरे पीछे हो ले; संत मत्ती 16 : 24
बार किये गये तमाम किस्म के पाप के बोझ से दबे हुए हुए हैं। यदि हमारा पहला पाप झूठ है, तो वे हमारे और सारी मानवजाति के
पहली पहली बार की गई झगड़ा,
पहली पहली बार की गई क्रोध,
पहली पहली बार की गई ईष्य-दवेष,
पहली पहली बार की गई लालच,
पहली पहली बार की गई चोरी,
पहली पहली बार की गई कामचोरी,
पहली पहली बार की गई चापलूसी,
पहली पहली बार की गई कानाफूसी,
पहली पहली बार की गई घृणा,
पहली पहली बार की गई थमंड,
पहली पहली बार की गई पाखंड,
पहली पहली बार की गई दिखावा,
पहली पहली बार की गई ऊंच-नीच,
पहली पहली बार की गई धूसखोरी,
पहली पहली बार की गई ................ के बोझ से गिरकर कर दबे हुए हैं। यदि औसतन पहली पहली बार समस्त मानवजाति के द्वारा की गई पापों की संख्या 10 है, तो ईसा दूसरी बार जिस क्रूस के बोझ से दबे हैं
उस क्रूस का वजन = 10 X सृष्टि के आरंभ से मानवजाति की आबादी = 10 X 789 करोड़ = 7890 करोड़ (लगभग)
उफ़! कितना वजनी है ईसा का बोझ (क्रूस)!!
इसलिए ईसा मसीह की मुक्ति के कार्य में सहभागी होने के लिए अपने जीवन में पहली पहली बार की गई तमाम पापों के लिए सच्चे हृदय से उस पश्चातापी-डाकू की डाकू की तरह पश्चाताप करना जरूरी है।
आइए, अपनी पहली पहली बार की तमाम पापों के लिए सच्चे पश्चताप कर ईसा को उठ कर कलवरी में आगे बढ़ने में मदद करें क्योंकि लिखा है -
फिर धर्मग्रंथ का एक दूसरा कथन इस प्रकार है - उन्होंने जिसे छेदा, वे उसी की ओर देखेंगे। संत योहन 19 : 37
आमीन।
ईश्वर की महिमा में जारी.....
04/04/2023
क्या मैं ईसा मसीह के मुक्ति कार्य में सहभागी हूं? क्या मैंने अपने पहले पाप के बोझ तले दबे ईसा को उठने में मदद किया? क्या मैंने अपनी तमाम पहली-पहली पाप के बोझ तले दबे ईसा को उठने में मदद किया? यदि हां! तो देखिये! ईसा कलवरी की राह में *तीसरी बार* अत्यंत वजनी क्रूस के बोझ तले गिर कर दबे हुए हैं और मुझसे,आपसे और सारी मानवजाति से, और बड़ी ही मशक्कत भरी आवाज में कह रहे हैं -
जो मेरा अनुसरण करना चाहता है, वह आत्मत्याग करें और अपना क्रूस उठाकर मेरे पीछे हो ले; संत मत्ती 16 : 24
उनकी इस वाणी को सुनकर अनुपालन करना निहायत जरूरी है। लेकिन इस वचन का अनुपालन करने के बजाए, ईसा मसीह की गमगीन दशा पर यरूशलेम की स्त्रियां छाती पीट-पीटकर के रो रही है। ईसा मसीह क्रूस का वजन कम कर उन्हें उठने में मदद की बात कर रहें हैं, तो ये स्त्रियां रो रही हैं क्योंकि उन्हें क्रूस के वजन का करामत तो दिखाई दे रहा है लेकिन वे क्रूस के वजन और "वजन के कारण" से अनभिज्ञ है इसलिए ईसा मसीह उनसे कहते हैं -
ईसा ने उनकी और मुड़कर कहा, "यरूशलेम की बेटियों! मेरे लिए मत रोओ। अपने और अपने बच्चों के लिए रोओ। संत लूकस 23 : 28
इसलिए ईसा मसीह के कहे अनुसार रोने अर्थात अपने पापों के लिए विलाप करने के लिए तीसरी बार जिस क्रूस के बोझ तले ईसा मसीह दबे हुए हैं, उसके वजन की समझ निहायत ही जरूरी है। ईसा मसीह बिल्कुल हम मानव जैसे शरीरधारी हैं इसलिए जैसे-जैसे कलवरी में वे आगे बढ़ रहे हैं उनकी शारीरिक क्षमता घट रही है; हालांकि, क्रूस के काठ का वजन स्थिर है लेकिन मानवजाति के कोलाहल के कारण उनके उपर पापों का बोझ निरंतर बढ़ता ही जा रहा है। तो सवाल यह है कि इस समय क्रूस (पाप) का वजन कितना है? ईसा मसीह हमें हमारी कमजोरियों से उठाने के लिए, शारीरिक तौर पर कमजोर हो कर, हमारी कमजोरियों के नीचे दब गए हैं और हम सब से कहते हैं -
थके-मांदे और बोझ से दबे हुए लोगों! तुम सभी मेरे पास आओ! मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। मेरा जुआ अपने ऊपर ले लो और मुझसे सीखो। मैं स्वभाव से नम्र और विनीत हूं। इस तरह तुम अपनी आत्मा के लिए शांति पाओगे। क्योंकि मेरा जुआ सहज है और मेरा बोझ हल्का। संत मत्ती 11 : 28-30
हम मनुष्य अपनी अपनी कमजोरियों के कारण से थक हार गए हैं। इसलिए अपने आप से यह सवाल पूछना जरूरी है कि मेरी कमजोरी क्या है? क्या मैं
--> बार-बर स्वार्थ करता हूं?
--> बार-बर लालच करता हूं?
--> बार-बर क्रोध करता हूं?
--> बार-बर घमंड करता हूं?
--> बार-बर पाखंड करता हूं?
--> बार-बर दिखावा करता हूं?
--> बार-बर ईष्य-दवेष करता हूं?
--> बार-बर चुगलखोरी करता हूं?
--> बार-बर कामचोरी करता हूं?
--> बार-बर गर्भपात करता हूं?
--> बार-बर माता-पिता का अनादर करता हूं?
--> बार-बर दूसरों को चिढ़ाता हूं?
--> बार-बर जात-पात करता हूं?
--> बार-बर भेदभाव करता हूं?
--> बार-बर कपट करता हूं?
--> बार-बर झूठी गवाही देता हूं?
--> बार-बर लड़ई-झगड़ा करता हूं?
--> बार-बर घूस देता और लेता हूं?
--> बार-बर अत्याचार करता हूं?
--> बार-बर नशापान करता हूं?
--> बार-बर ................... करता हूं?
यह आकलन जरूरी है कि मेरी कौन-कौन सी कमजोरियां है और मैं अपनी कमजोरियों में दिन भर में कितनी बार गिरता हूं। ईसा मसीह हमें हमारी कमजोरियों से उठाने के लिए हमारे कमजोरियों के बोझ तले गिर कर दबे हुए हैं। हमें ईसा मसीह के कंधे पर से अपनी कमजोरियों को हटा कर उनके मुक्ति कार्य में सहभागी होना है। इसलिए आइए अपनी अपनी कमजोरियों आकलन करें---
यदि मेरी 5 कमजोरियां है और दिन भर में मैं औसतन उन कमजोरियों में पांच पांच दफा गिरता हूं
तो 1 दिन में मैं 5 X 5 = 25 बार ईसा मसीह के कांधे पर का बोझ बढ़ाता हूं।
तो साल भर में मैं
5 X 5 X 365 = 9125 बार ईसा मसीह के कांधे पर का बोझ बढ़ाता हूं।
यदि मानवजाति की औसतन आयु 70 बर्ष है,
तो अपने जीवन काल में मैं
5 X 5 X 365 X 70 = 6,38,750 बार ईसा मसीह के कांधे पर का बोझ बढ़ाता हूं।
यदि इस संख्या को औसत माना जाए तो क्रूस का वजन
= 6,38,750 X सृष्टि के आरंभ से आज तक मानव की जनसंख्या
संसार की आज की अनुमानित जनसंख्या के अनुसार आज क्रूस का वजन
= 6,38,750 X 789 करोड़ = 50,39,73,750 करोड़।
ईसा मसीह आज हम मनुष्यों की इतनी भारी कमजोरियों के बोझ तले दबे हुए हैं। आइए! हम उस भले डाकू की तरह अपनी कमजोरियों में गिरना बंद कर पश्चातापी-पापी बनकर ईसा मसीह का अनुसरण करें। क्योंकि ईसा हमें हमारी कमजोरियों से मुक्त कर देने के लिए तीसरी बार कलवारी की राह पर गिरे हुए हैं।
थके-मांदे और बोझ से दबे हुए लोगों! तुम सभी मेरे पास आओ! मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। मेरा जुआ अपने ऊपर ले लो और मुझसे सीखो। मैं स्वभाव से नम्र और विनीत हूं। इस तरह तुम अपनी आत्मा के लिए शांति पाओगे। क्योंकि मेरा जुआ सहज है और मेरा बोझ हल्का। संत मत्ती 11 : 28-30
आमीन।
ईश्वर की महिमा में जारी.....
ईश्वर की महिमा हो, ईश्वर को धन्यवाद।
आमीन।
"न अधर्म" ही धर्म है।"
झारखण्ड! तुम्हें शांति मिले!!
भारत! तुम्हें शांति मिले!!
संपूर्ण विश्व को शांति!!