THE CROSS

क्रूस का वजन और मेरे द्वारा निर्मित पहला क्रूस

प्रकाशित 30/03/2023


हां! तो क्रूस का वजन , जिसका मैं लगातार वर्णन कर रहा हूं, इतना भारी था कि ईसा मसीह कई बार कलवरी के राह पर गिर पड़े। तो चिंतन करने वाली अनमोल बात यह है कि जब वे पहली बार गिर कर क्रूस के नीचे दब गए, तो उस वक्त क्रूस का वजन कितना था!! आइये, इस बात के पीछे छिपे धार्मिकता की आवश्यकता को‌ समझने की कोशिश करते हैं:


क्या हम जानते हैं कि हमने अपने जीवन में पहली बार कौन सा पाप किया है? मेरा पहला‌ पाप क्या है? क्या मेरा पहला पाप स्वार्थ था, या घमंड था, या ईष्य-दवेष धा, या वासना-व्यभिचार था, या लालच था, या कानाफूसी था, या चुगल खोरी था या........ अर्थात, मेरे द्वारा निर्मित पहला क्रूस क्या है? स्मरण हो, जब इंसानी अपवित्र इच्छा ईश्वर की पवित्र इच्छा को काटती है, तो क्रूस तैयार होता है; इस तरह पाप का बोझ हम ईसा कांधे पर लादते हैं। अपनी कौन सी पहली अपवित्र इच्छा से हमने ईश्वर की पवित्र इच्छा को काट कर पाप (क्रूस) का बोझ तैयार किया है। यदि हम क्रूस का बोझ बनाएंगे, तो‌ पिता की पवित्र इच्छा को पूरी करने के लिए हमारे प्रभु ईसा मसीह को वह बोझ ढोना ही पड़ेगा।


दूसरे दिन योहन ने ईसा को अपनी और आते देखा और कहा, "देखो-ईश्वर का मेमना जो संसार का पाप हरता है।" संत योहन 1 : 29


हमें तो बिल्कुल पता ही नहीं कि हमारा पहला पाप क्या है; लेकिन उस पहले पाप से हमें हरने के लिए, ईसा‌ मसीह को हमारे पहले पाप के बोझ को उठाना पड़ा।


जब पहली बार ईसा मसीह गिरे, तो वे हमारे, आपके और सारी मानवजाति के पहली पहली बार की गई पाप के बोझ से दब गए। संसार की जितनी आबादी, क्रूस उतना ही भारी। संसार की सृष्टि के आरंभ से आदमी-हेवा और स्त्री-पुरुष के संसर्ग से जितने मानव सृष्ट हुए, उतने पहले पाप के बोझ से पहली बार कलवरी की राह पर ईसा मसीह गिर कर दब हुए हैं‌ और हमसे कहते हैं


जो मेरा अनुसरण करना चाहता है, वह आत्मत्याग करें और अपना क्रूस उठाकर मेरे पीछे हो ले; संत मत्ती 16 : 24


इसलिए आइए, अपने जीवन की पहली पाप के बोझ को, पहली बार कलवरी की राह में गिरे हुए ईसा मसीह के कांधे से उठा कर पश्चताप करें। यदि हम अपने पहले पाप के लिए क्षमा नहीं मांगते हैं, तो फिर कैसे उसके बाद के पापों के लिए क्षमा मांगते हैं? ईसा मसीह तो हमें हमारे पहले पहले पाप से मुक्त कर देने के लिए पहली बार हमारे पहले पाप के बोझ से गिरकर दबे हुए। क्या हम अपने पहले पाप से मुक्त होना चाहते हैं?


यदि हां! तो ईसा मसीह से सच्चे हृदय से यह छोटी दया याचना करें-- पिता हम अपने पहले पाप को याद तो नहीं करते हैं, लेकिन आप ठीक से जानते हैं कि हमने पहली बार क्या कुकर्म किया है। हम सारे ह्रदय से क्षमा याचना करते हुए आप के कांधे से अपने पहले पाप के बोझ को हटाना चाहता हैं। हमें क्षमा करें। आमीन।


हमने अपने पहले पाप से ईश्वर को दुखित किया है इसलिए उस पहले पाप के कारण ईश्वर को दुःख देने के लिए उपरोक्त क्षमा याचना उचित है क्योंकि लिखा है:


फिर धर्मग्रंथ का एक दूसरा कथन इस प्रकार है - उन्होंने जिसे छेदा, वे उसी की ओर देखेंगे। संत योहन 19 : 37


आमीन।


ईश्वर की महिमा में जारी.....


ईश्वर की महिमा हो, ईश्वर को धन्यवाद।


आमीन।


"न अधर्म" ही धर्म है।"


झारखण्ड! तुम्हें शांति मिले!!

भारत! तुम्हें शांति मिले!!

संपूर्ण विश्व को शांति!!