प्रकाशित 29/03/2023
ईसा मसीह बोलने और देखने के लिए काठ का क्रूस ढोए हुए हैं, लेकिन हकीकत यह है कि जो बोझ वो ढोए हुए हैं, वह काठ के वजन से अत्यधिक वजनी है। ईसा मसीह ईश्वर होने के बावजूद ठीक आप और हम जैसे शरीरधारी होने के कारण कलवरी (क्रूस) के रास्ते अनेकानेक बार उस असहाय बोझ के वजन से गिर पड़े होंगे, जिसकी हम सिर्फ कल्पना ही कर सकते हैं, क्योंकि पवित्र वचन बतलाता है कि
वह मनुष्यों द्वारा निंदित और तिरष्कृत था, शोक का मारा और अत्यंत दुखी था। लोग जिन्हें देखकर मुंह पर लेते हैं, उनकी तरह ही वह तिरष्कृत और तुच्छ समझा जाता था। परंतु वह हमारे ही रोगों को अपने ऊपर लेता था और हमारे ही दुखों से लदा हुआ था और हम उसे दंडित, ईश्वर का मारा हुआ और तिरस्कृत समझते थे। नबी इसायाह का ग्रंथ 53 : 3-4
ईसा के राह में बार-बार गिरने और उनके मनमुताबिक स्पीड से कलवारी नहीं तय कर पाने की वजह से ही उन लोगों ने सिमोन को उनका काठ का क्रूस ढोने के लिए मजबूर किया क्योंकि वे ईसा को उस काठ के क्रूस पर तड़प तड़प कर मरते देखना चाहते थे। काश! उन्हें पता होता कि "ईसा प्रेम अमर हैं, उसे नष्ट नहीं किया जा सकता है।"
शहर से निकलते समय उन्हें कुरेन निवासी सिमोन मिला और उन्होंने उसे ईसा का क्रूस उठा ले चलने के लिए बाध्य किया। संत मत्ती 27 : 32
जरूर उन्होंने काठ के क्रूस का वजन ईसा मसीह के कांधे से उठाकर सिमोन के कांधे डाल दिया, लेकिन ऐसा उन्होंने ईसा मसीह को मदद पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि ईसा मसीह को अपने मन मुताबिक मृत्यु देने की मंशा से किया और ईसा मसीह के कांधे का बोझ घटाने के बजाय और ज्यादा बढ़ा दिया।
हमें अपने आप से यह सवाल करना जरूरी है कि क्या हम अपने जीवन में अपने स्वार्थ के कारण से दूसरों को फायदा पहुंचाने का प्रयास करते हैं? यदि हां! तो यह प्रेम के विरूद्ध है क्योंकि
दूसरों से अपने प्रति जैसा व्यवहार चाहते हो, तुम भी उनके प्रति वैसा ही किया करो। यदि तुम उन्हीं से प्यार करते हो, जो तुमसे प्यार करते हैं, तो इसमें तुम्हारा पुण्य क्या है? यदि तुम उन्हीं की भलाई करते हो, जो तुम्हारी भलाई करते हैं, तो इसमें तुम्हारा पुण्य क्या है? पापी भी ऐसा करते हैं। संत लूकस 6 : 31-33
क्या हम दूसरों की अपेक्षा अपने आप से ज्यादा प्रेम तो नहीं करते!!!
आमीन।
ईश्वर की महिमा में जारी.....
ईश्वर की महिमा हो, ईश्वर को धन्यवाद।
आमीन।
"न अधर्म" ही धर्म है।"
झारखण्ड! तुम्हें शांति मिले!!
भारत! तुम्हें शांति मिले!!
संपूर्ण विश्व को शांति!!