THE CROSS

दृश्यमान और अदृश्य क्रूस का निर्माण

प्रकाशित 20/03/2023


काठ-के-क्रूस और पाप-के-क्रूस के निर्माण की जानकारी बहुत जरूरी है क्योंकि ईसा मसीह कहते हैं -


जो मेरा अनुसरण करना चाहता है, वह आत्मत्याग करें और अपना क्रूस उठाकर मेरे पीछे हो ले; संत मत्ती 16 : 24


काठ-का-क्रूस जिस पर ईसा मसीह टांगें गये थे, वह दो काठो के एक दूसरे को काटने से बना हैं।


पहला काठ, जो जमीन के बिल्कुल समानान्तर है, जिसमें ईसा मसीह का हाथ ठुका है; वह ईश्वर की पवित्र इच्छा को दर्शाता है। जब ईसा मसीह को गोलगोथा पहुंचने पर क्रूस के काठ पर पटक दिया गया, धकेल दिया गया, तो "उन्होंने स्वेच्छा से अपने दोनों हाथों को उस काठ पर पिता ईश्वर की पवित्र इच्छा पूरी करने के लिए फैला दिये, क्योंकि गेथसेमनी बारी में ईसा मसीह का रक्त, पसीने की बूंदों की तरह बहने के बाबजूद पिता ईश्वर अपनी पवित्र इच्छा पूरी करने हेतु मौनधारी बन कर मानव मुक्ति की अपनी योजना पर कायम रहे-


उन्होंने कहा, "अब्बा! पिता! तेरे लिए कुछ भी असम्भव नहीं है। यह प्याला मुझसे हटा लें। फिर भी मेरी नहीं, बल्कि तेरी ही इच्छा पूरी हो।" संत मरकुस 14 : 36


हालांकि पिता ईश्वर ने कलवरी की राह, मानव मुक्ति की राह पर ईसा मसीह के चलने की अपनी पवित्र इच्छा पर कायम रहे और प्राणपीड़ा झेल रहे ईसा मसीह को स्वर्गीय ढांढस दिया -


तब उन्हें स्वर्ग का एक दूत दिखाई पड़ा, जिसने उनको ढांढस बंधाया। संत लूकस 22 : 43


इसलिए जिस काठ पर ईसा मसीह का हाथ ठुका है, वह ईश्वर की पवित्र इच्छा को दर्शाता है, जो बहुत अच्छा है।


दूसरा काठ, जो जमीन पर खड़ा है, वह हम मनुष्यों की अपवित्र इच्छा को दर्शाता है, जो ईसा मसीह को क्रूस पर टांग कर मारने के लिए अड़ा है -


"किन्तु वे चिल्लाते रहे, "इसे क्रूस दीजिए! इसे क्रूस दीजिए!" परन्तु वे चिल्ला-चिल्ला कर आग्रह करते रहे कि इसे क्रूस दिया जाए और उनका कोलाहल बढ़ता जा रहा था। संत लूकस 23 : 21, 23


उन्होंने तो उस दिन स्वामी को मारने के लिए, प्रेम को मारने के लिए काठ-के-क्रूस का निर्माण किया। हम आज वैसा ही करते हैं, बस हमारा क्रूस दिखाई नहीं पड़ता है, जिसकी (पाप-के-क्रूस) चर्चा अगले भाग में पढ़ें।


क्योंकि


जो मेरा अनुसरण करना चाहता है, वह आत्मत्याग करें और अपना क्रूस उठाकर मेरे पीछे हो ले; संत मत्ती 16 : 24


आमीन।


ईश्वर की महिमा में जारी.....


21/03/2023


हां! तो क्रूस का वह समानांतर (पड़ी) काठ, जिस पर पर ईसा मसीह ने अपने दोनों पवित्र हाथ स्वेच्छा से, पिता परमेश्वर की पवित्र इच्छा की पूर्ति में फैला दिए, वह पिता परमेश्वर की पवित्र इच्छा का प्रतीक है; क्योंकि ईसा मसीह ने कलवरी की राह, जो गेथसेमनी बारी से शुरू हुई, पर भारी मुसीबत के बाबजूद विरोध के एक शब्द नहीं बोले, कारण कि पिता परमेश्वर (प्रेम) की पवित्र इच्छा उनके सामने निरंतर पड़ी (बनी) रहीं ; क्योंकि पिता परमेश्वर (प्रेम) की पवित्र इच्छा है कि


मैं तुम लोगों को एक नई आज्ञा देता हूं- तुम एक दूसरे को प्यार करो। जिस प्रकार मैंने तुम लोगों को प्यार किया, उसी प्रकार तुम भी एक दूसरे को प्यार करो। संत योहन 13 : 34


क्रूस का वह लंबित (खड़ी) काठ जिस पर उन्हें क्रूस दीजिए, उसे क्रूस दीजिए चिल्लाने वालों ने अपनी अपवित्र इच्छा की पूर्ति में ईसा मसीह के दोनों पवित्र पैरों को समेट कर ठोक दिया, वह मनुष्यों की अपवित्र इच्छा का प्रतीक है। ईसा लंबी कलवारी के राह पर चलकर बिल्कुल थक हार गए थे। पूरी तरह से छत विच्छेद थे, जैसा कि इसायह नबी ने अपने ग्रंथ अध्याय 53 में भविष्यवाणी कर रखी है। वे मानव थे, इसलिए उनकी शक्ति भी हम मानव की तरह ही क्षीण हो गई थी। ऐसी हालत में खड़ी काठ पर उनका पैर समेटना उनके लिए मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन था। इसलिए उसे क्रूस दीजिए, उसे क्रूस दीजिए चिल्लाने वाले लोगों ने अपनी अपवित्र इच्छा पूरी करने के लिए उस खड़ी काठ पर ईसा के दोनों पैरों को समेट कर कील ठोक दिया। इसलिए वह खड़ी काठ जिसमें ईसा मसीह का पवित्र पैर ठुका है, वह मनुष्यों की अपवित्र इच्छा को दर्शाता है।


ईसा मसीह की उपरोक्त पवित्र इच्छा निरंतर (समानान्तर तौर पर) हम मनुष्यों के पीछे पड़ी (बनी) है। इसलिए प्रेम नहीं करने के लिए, प्रेम (ईसा मसीह) को अपने बुराई (ईर्ष्या द्वेष क्रोध वासना व्याभिचार लालच घमंड पाखंड दिखावा घृणा चुगल खोरी मनमुटाव काम चोरी घूसखोरी......…...) के रास्ते से साफ करने के लिए 2023 बर्ष पहले लोगों ने काठ-का-क्रूस बनाया।


क्या वे ईसा मसीह को खत्म कर पाये? बिल्कुल नहीं! क्योंकि प्रेम (ईसा मसीह) अमर हैं। लेकिन आज भी प्रेम को मारने का निरर्थक कोशिश, निरंतरता के साथ जारी है क्योंकि प्रेम निरंतर (समानांतर तौर पर) हम मनुष्यों के पीछे पड़ी है इसलिए आज भी हम मनुष्य बुराई करने के लिए प्रेम (ईसा मसीह) को अपने रास्ते से हटाने निरर्थक प्रयास करते हैं।


जब-जब हम मनुष्य ईश्वर की पवित्र इच्छा को अपनी अपवित्र इच्छा से काटते हैं, अदृश्य क्रूस का निर्माण करते हैं!! पाप-का-क्रूस का निर्माण करते हैं। 2023 साल पहले, उन्होंने सिर्फ एक क्रूस का निर्माण किया, जबकि हम प्रतिदिन अनेकानेक अदृश्य क्रूस का निर्माण करते हैं और प्रेम को मारने का निरर्थक प्रयास करते हैं। इसलिए ईसा मसीह (अमर प्रेम) इस संसार रुपी कलवरी की राह में हमारी ओर मुढ़ कर कहते हैं :


थके-मांदे और बोझ से दबे हुए लोगों! तुम सभी मेरे पास आओ! मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। मेरा जुआ अपने ऊपर ले लो और मुझसे सीखो। मैं स्वभाव से नम्र और विनीत हूं। इस तरह तुम अपनी आत्मा के लिए शांति पाओगे। क्योंकि मेरा जुआ सहज है और मेरा बोझ हल्का। संत मत्ती 11 : 28-30


हम पाप का क्रूस निर्माण करते-करते निरर्थक ही थक हार गए हैं। इससे ईसा मसीह (प्रेम) का कोई नुकसान नहीं होने वाला, वह तो अमर हैं। इसलिए इस संसार रूपी कलवारी में हमारे लिए उचित होगा कि हम उस भले डाकू के समान कलवारी का रास्ता तय कर शांति प्राप्त करें।


क्योंकि


जो मेरा अनुसरण करना चाहता है, वह आत्मत्याग करें और अपना क्रूस उठाकर मेरे पीछे हो ले; संत मत्ती 16 : 24


आमीन।


ईश्वर की महिमा में जारी.....


ईश्वर की महिमा हो, ईश्वर को धन्यवाद।


आमीन।


"न अधर्म" ही धर्म है।"


झारखण्ड! तुम्हें शांति मिले!!

भारत! तुम्हें शांति मिले!!

संपूर्ण विश्व को शांति!!