प्रकाशित 19/02/2023
यह गहन चिंतन का बिषय है कि जो क्रूस ईसा मसीह के कांधे पर लादा गया था, उसका वजन कितना था; वह क्रूस कितना भारी था! यदि सिर्फ लकड़ी के क्रूस को उठाने की बात होती, तो यह ईसा मसीह के लिए बहुत ही आसान बात होती; क्योंकि हम जानते हैं कि ईसा मसीह के साथ दो और डाकू लकड़ी का क्रूस उठाकर उनके साथ चल रहे थे और उन दोनों डाकू की हालत वैसी नहीं थी, जैसा कि ईसा मसीह की।
वह मनुष्यों द्वारा निंदित और तिरष्कृत था, शोक का मारा और अत्यंत दुखी था। लोग जिन्हें देखकर मुंह पर लेते हैं, उनकी तरह ही वह तिरष्कृत और तुच्छ समझा जाता था। नबी इसायाह का ग्रंथ 53 : 3
नबी इसायाह का ग्रंथ अध्याय 53 पढ़ें।
उपरोक्त पवित्र वचन बात इस बात का प्रमाण है कि जो क्रूस ईसा मसीह ढोकर चल रहे हैं, वह काठ के वजन से अत्यधिक वजनी है। तो इस संदर्भ में पहला सवाल यह है कि पाप, क्रूस कैसे हैं? यह समझना उचित है, क्योंकि हम काठ के क्रूस को ही सिर्फ क्रूस समझते हैं क्योंकि हम उसे अपनी आंखों से देख सकते हैं, छू सकते हैं; हालांकि काठ का क्रूस किसी की मौत के लिए बनाना भी पाप है; इसलिए काठ का क्रूस, पाप के बोझ को दर्शाता है। पाप का बोझ, ऐसा क्रूस है जिसे न हम देख सकते हैं और न छू सकते हैं। किसी की मौत के लिए लकड़ी का क्रूस और पाप का क्रूस दोनों के तैयार करने का तरीका एक है; फर्क इतना है कि जब लकड़ी का क्रूस बनता है, तो दिखता है, लेकिन किसी का पाप का क्रूस दिखाई नहीं पड़ता है। मनुष्यों द्वारा पाप रूपी क्रूस का निर्माण, जो अदन वाटिका से शुरू हुई वह थमने का नाम नहीं लेती है-
- अदन वाटिका से निकाले जाने के बावजूद हम मनुष्यों को समझ नहीं आया कि पाप रुपी क्रूस का निर्माण नहीं करना है।
- नोवा के समय 40 दिनों के जलप्रलय के बाद भी हम मनुष्यों को समझ नहीं आया कि पाप रुपी क्रूस का निर्माण नहीं करना है।
- ईसा मसीह ईश्वर हैं और ईश्वर प्रेम हैं। प्रेम को क्रूस का मौत देने के बाबजूद हम मनुष्यों को समझ नहीं आया कि पाप रुपी क्रूस का निर्माण नहीं करना है।
इसलिए काठ-के-क्रूस और पाप-के क्रू के निर्माण की जानकारी बहुत जरूरी है, जिसकी चर्चा अगले भाग में पढ़ें।
क्योंकि
जो मेरा अनुसरण करना चाहता है, वह आत्मत्याग करें और अपना क्रूस उठाकर मेरे पीछे हो ले; संत मत्ती 16 : 24
आमीन।
ईश्वर की महिमा में जारी.....
ईश्वर की महिमा हो, ईश्वर को धन्यवाद।
आमीन।
"न अधर्म" ही धर्म है।"
झारखण्ड! तुम्हें शांति मिले!!
भारत! तुम्हें शांति मिले!!
संपूर्ण विश्व को शांति!!