हकीकत

जंग थमने का नाम नहीं लेती पर दो लाइनें पढ़ता हूं .......

प्रकाशि 02/08/2025


(1) काश! मैं दुनिया का एक जाना-माना बड़ा मजहबी रहनूमा होता,
या दुनिया की बड़ी हस्ती या सबसे ऊंची गद्दी पर आसीन होता ।।
मैं असलाहों की तबाही के बीच पनाह ले लेता ।
मुझे जंग के मैदान में देख, मजाल है, कोई असलाहें पटकने की औकात दिखा पाता।।
और मैं दुनिया विजेता के साथ-साथ अमन के पुरस्कार का एक दमदार दावेदार बन जाता ।।
काश! मैं दुनिया का एक जाना माना बड़ा मजहबी रहनूमा होता, या दुनिया की बड़ी हस्ती या सबसे ऊंची गद्दी पर आसीन होता ।।


(2) जिन्हें जंग रुकवाने की अवकात है, वे शान से जंग में शामिल हैं ।।
वे जरूर जंग रुकवा सकते हैं, मगर, वे तो असलाहों के सौदागार हैं ।।
ऐ खुदा! ये जंग कैसे रुकेगी, जब जंग रुकवाने के किरदार ही, मौत के सौदागर हैं।।


(3) ऐ खुदा! मुझे एक बाबा दे दे ।
जो तबाही में जुटे दबंगों के दर पे,
तेरे अमन का पैगाम ले जाए,
जो मासूमों की भूख मिटाए,
जो औरतों के जानलेवा ज़ख्मों पर मलहम लगाए,
और बुजुर्गो के लाचार बेबस जिस्म की रीढ़ बन जाए ।।
ऐ खुदा! मुझे एक ऐसा बाबा दे दे, नहीं, तो मेरी ये ख्वाहिश उस बाबा तक पहुंचा दे ।।
ऐ खुदा! मुझे एक ऐसा बाबा दे दे ।।




ईश्वर की महिमा हो, ईश्वर को धन्यवाद।


आमीन।


"न-अधर्म" ही धर्म है।"


झारखण्ड! तुम्हें शांति मिले!!

भारत! तुम्हें शांति मिले!!

संपूर्ण विश्व को शांति!!