प्रकाशित 24/07/2025
(1) एक दिन भूखे रह कर तो देखो । एक दिन का रोजा रख कर तो देखो ।।
ये मत कहना खुदा नहीं सुनता । अपने अंदर की खुदा जगा कर तो देखो ।।
(2) भले मजहब में मतभेद चलता हो । कोई शिया कोई सुन्नी कोई ईसाई होता हो ।।
इन्सान सब एक हैं, खुदा के बंदों । तशरीफ़ लाइए, हाथ बटाइये, जहां मासूम भूखे मरता हो ।।
(3) जूदा रह कर क्रूरता को सहना । दबंग की सलामी से कम नहीं ।।
इंतजार मत कर, खुदा तुझसे जरुर पूछेगा, कहां थे तुम्हारे बाजू ।।
(4) ताली ना बजाना, तालियों की मुझे भूख नहीं ।
आप जो इन नज्मों को जेहान में उतार लें, वह तालियों से कम नहीं ।।
(5) कत्ल करते हैं, इन्हें कत्ल की कीमत पता नहीं । मेरे खुदा इन्हें कत्ल की कीमत का पता नहीं ।।
कत्ल करने की मनाही है; तो क्या इन्हें - कत्ल की बंदिशों का पता नहीं ।।
(6) उन्हें कैद में देख मुझे तरस आया । उनका कैद से समुंद्र झांकना मुझे तड़पाया ।।
ऐ खुदा उनके फौजों को नजरबंद कर दे । उन्हें अपने पलकों से झांकने पर पाबंदी लगा दे ।।
तब उन्हें राहत मिलेगा, और वह समुंद्र से भूख मिटा लेगा। ।।
(7) सूरज उगता है, डूब जाने को । उगते ही डूबने का मंजर कभी देखा है ।।
असमय डूबने का मंजर किसने देखा है । एक ऐहसास है, दर्दनाक एहसास है ।।
जिसने भी वह मंजर देखा है, उसे महसूस है दर्द - एक कदम बढ़ने और दो कदम घटने का ।।
रोज सोचते हैं वे आगे निकलने की, लेकिन शाम होते फिर दो कदम पीछे हो जाते हैं।।
(8) आबाद से बर्बाद तक, आज बर्बाद है, गाजा आबाद ।।
जिसके सर पर है बर्बादी का भूत, वो आबाद है वो बर्बादी का भूत ।।
ऐ खुदा तू मेरी ये दुवा सुन ले, उस सरफिरे की सर तू सीधी कर दे ।।
उन मासूमों की है क्या ये कसूर, उस सरफिरे की सर तू सीधी कर दे ।।
भूख से तड़प रहे उन मासूमों को, ऐ खुदा तू उन्हें खाना परोसा दें ।।
सरफिरे ने ठानी है, उन्हें भूखे मरने की, उस सरफिरे की सर तू सीधी कर दे ।।
(9) पानी को मरहूम वे, अब आंसू ही घूंट लेते हैं ।
जिनके आंखों में आंसू नहीं, वे पानी के हाहाकारों पर टूटते हैं ।।
(10) इक दर्द का ऐसा मंजर, सुन कर मैं हैरान हूं ।
वह तो अम्मा है, जो दर्द भरे मंजर का चश्मदीद हूं ।।
अपने नवजात की लाश पर बिलखती है, कहती हैं, काश! तू मेरे कोक में ना आया होता ।
तुझे पालने की जिद्द ना पालती मैं ।।
क्यों तू पैदा होते ही जुल्म को कुर्बान हुआ । क्यों तू मेरे कोक में दो और दिन रुक ना सका ।।
माफ़ करना मैं तूझ बचा ना सकी । इन जालिमों के हाथ से तुझे छुड़ा ना सकी ।।
सब खत्म हो गया मेरे औलाद । तेरी मेरी तमन्ना बारुदों में दफन हो गई ।।
उनके बगीचे की खाद उन मासूमों से आती हैं। नासमझ वे अपने गमलों की फूल देख इतराते हैं।।
उन्हें कहां पता उन गमले में फूल नहीं, मासूम मुस्कुराते हैं।।
ईश्वर की महिमा हो, ईश्वर को धन्यवाद।
आमीन।
"न-अधर्म" ही धर्म है।"
झारखण्ड! तुम्हें शांति मिले!!
भारत! तुम्हें शांति मिले!!
संपूर्ण विश्व को शांति!!