प्रकाशित 01/07/2020
आईये, आज चर्चा को प्रभु के एक पवित्र वचन से शुरू करते हैं; जैसा कि धर्म गंथ में लिखा है :
मनुष्य को इस से क्या लाभ यदि वह सारा संसार प्राप्त कर ले, लेकिन अपना जीवन गवाँ दे? अपने जीवन के बदले मनुष्य दे ही क्या सकता है? क्योंकि मानव पुत्र अपने स्वर्गदूतों के साथ अपने पिता की महिमा-सहित आयेगा और वह प्रत्येक मनुष्य को उसके कर्म का फल देगा। मती 16 : 26-27
हम सब-के-सब आधुनिकीकरण के शिकार हैं- कोई ज्यादा कोई कम। आधुनिकीकरण में नहीं पिछड़ने के लिए हम हर-संभव प्रयास करते हैं; यहाँ तक कि अपना और अपने परिवार की शांति तक को दाँव पर लगाते हैं। आइए, एक उदाहरण के साथ अवलोकन करें कि इस आधुनिकीकरण के दौड़ में हमने क्या पाया और क्या खोया है!
किसी परिवार में पति-पत्नी, दोनों काम पर निकल जाते हैं और उनका नवजात शिशु किसी तीसरे व्यक्ति की छत्रछाया में पल-बढ़ रहा है।
- घर से कार्यालय जाने की तैयारी में 1-2 घंटे लगते हैं
- कार्यालय पहुँचने में 1 घंटे लगते हैं
- कार्यालय में 8 घंटे देते हैं
- कार्यालय से घर लौटने में 1 घंटे लगते हैं
- कार्यालय से लौट कर थकान दूर करने में आधा घंटे लगते हैं
अर्थात्
उनका नवजात शिशु किसी दूसरे व्यक्ति की छत्रछाया में 11 से 12 घंटे रोजाना रहता है, तो सोचिए कि बच्चा किससे संस्कार प्राप्त करेगा, माता-पिता से या देख-रेख करने वाले से?
हमें यह समझना जरूरी है कि किसी भी बच्चे की समझने-बुझने की क्षमता माता के गर्भ से ही शुरू हो जाती है। यदि ऐसा नहीं होता तो एलिजाबेथ के गर्भ में उसका छः महीने का बच्चा (गर्भ) कैसे उसके गर्भ में उछल पड़ता! जैसा कि धर्म ग्रंथ में लिखा है:
उन दिनों मरियम पहाड़ी प्रदेश में युदा के एक नगर के लिए शीघ्रता से चल पड़ी। उसने जकरियस के घर में प्रवेश कर एलिजाबेथ का अभिवादन किया। ज्यों ही एलिजाबेथ ने मरियम का अभिवादन सुना, बच्चा उसके गर्भ में उछल पड़ा और एलिजाबेथ परित्याग पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो गए हो गयी। लूकस 1 : 39-41
इसका अर्थ है कि एलिजाबेथ के सुनने के साथ ही उसके गर्भ में पल रहा उसका छः महीने का बच्चा भी ईसा मसीह की माता, मरियम की आवाज को सुन कर अपनी माता के गर्भ में खुशी के मारे उछल पड़ा। वह अपनी माता की खुशी का ठीक उसी तरह से सहभागी हुआ जैसे कि मरियम के आगमन पर एलिजाबेथ आनंदित हो उठती है; जैसा कि धर्म गंथ में लिखा है :
वह ऊँचे स्वर से बोल उठी, “आप नारियों में धन्य हैं और धन्य है आपके गर्भ का फल! मुझे यह सौभाग्य कैसे प्राप्त हुआ कि मेरे प्रभु की माता मेरे पास आयी? *क्योंकि देखिये, ज्यों ही आपका प्रणाम मेरे कानों पड़ा बच्चा मेरे गर्भ में आनन्द के मारे उछल पड़ा।* लूकस 1: 42-44
यह इस बात का प्रमाण है कि बच्चा अपनी माता के गर्भ से ही सब कुछ समझता और जानता है। इसलिए किसी भी बच्चे का संस्कार / चरित्र निर्माण माता के गर्भ से ही शुरू हो जाता है। माता के गर्भ में पल रहा बच्चा सब कुछ सुनता है और जानता है। इसलिए माता-पिता के लिए उचित है कि वे अपने बच्चे की चरित्र निर्माण हेतु उचित परवरिश गर्भ धारण के साथ ही शुरू कर दें। जरा सोचिए, जो बच्चा अपनी माता के गर्भ से सब कुछ सुनता और समझता है, उसे यदि शिशु अवस्था में ईसा मसीह की जीवनशैली के अनुसार जीवन जीने के तरीके को समझाने के बजाय, किसी तीसरे के हवाले करेंगे, तो वो बच्चा ईसा मसीह की जीवनशैली के अनुसार जीवन जीने की शिक्षा कैसे ग्रहण करेगा? और जब माता-पिता ही उसे ईसा मसीह के अनुसार जीवन जीने की शैली की शिक्षा नहीं देंगे, तो वे कैसे उम्मीद करते हैं कि उनके बच्चे को दूसरे लोग ईसा मसीह की जीवनशैली की शिक्षा देंगे?
पैदा होकर अब बच्चा कुछ बड़ा हुआ तो माता-पिता उससे पिंड छुडाने के लिए उसे टेलीविजन के रिमोट कंट्रोल के साथ छोड़ देते हैं - अचानक एक दिन बच्चे की माँ, असमय अपने कार्यालय से फुर्सत पाकर घर आती हैं और अपने बच्चे के साथ समय बिताना चाहती हैं, उसके साथ खेलना चाहती हैं, उसे प्यार करना चाहती है, तो बच्चा अपने दिनचर्या को डिस्टर्ब होता देख माँ से पुछता है, “आप कितने देर में ऑफिस वापस जाएँगी?“ अब जरा सोचिए की बच्चा में संस्कार माता-पिता से आयेगा या टेलीविजन के हर कैरेक्टर से! क्या माता-पिता को एहसास है कि वे इस आधुनिकीकरण के इस अजीबोगरीब होड़ में क्या खो रहें हैं?
अब बच्चे को किशोरावस्था में माता-पिता कम्प्युटर तथा इटरनेट कनेक्शन पढ़ाई करने, गेम खेलने के लिए देकर बहुत गौरवान्वित महसूस करते है। वे यह नहीं जानते हैं कि ऐसा कर वे बच्चे को उस अंधकार में धकेल देते हैं जहाँ वह छुट कर इंटरनेट में उपलब्ध अश्लील सामग्रियों का आदि हो सकता है और सोशल मिडिया तक पहुँच कर उन लोगों के संपर्क में आ सकता है, जो उसके चरित्र के सर्वांगिक विकास में अपने फायदे के लिए बाधा पहुँचा कर बच्चे के चरित्र निर्माण को ध्वस्त कर दे सकते हैं। क्या आज के आधुनिकीकरण के अजीबोगरीब होड़ में ब्यस्त माता-पिता के पास अपने बच्चे के नजदीक बैठ कर उसे कम्प्युटर तथा इंटरनेट कनेक्शन का सदुपयोग सिखाने के लिए समय है?
अब बच्चा युवावस्था में पहुँच कर खुद आधुनिकीकरण की होड़ में माता-पिता से मोटरबाईक और मोबाईल ले लेता है या माता-पिता स्वयं अपने सोशल स्टेटस को पूरा करने के लिए अपने बच्चे को मोबाईल और मोटरबाईक दे देते हैं। चलिए, चलते हैं और सड़क पर नजर दौडा़ते हैं। आप जरूर अपने बेटे-जैसे बहुतों को स्टंट करते या पीछे गर्लफ्रेंड को चिपक कर बैठाए देख कर, शर्मा जाएँगे। क्या आज के आधुनिकीकरण की अजीबोगरीब होड़ में ब्यस्त माता-पिता विवाह संस्कार के विरूद्ध गुनाहगार नहीं हैं?
आइये, हम अपनी-अपनी पारिवारिक शांति की वर्तमान स्थिति पर विचार करें और पारिवारिक शांति हनन के लिए प्रभु से क्षमा माँग कर, पारिवारिक शांति की बहाली की प्रभु से कृपा प्राप्त करें। प्रभु! जो असीम दयालु है, हम सबों को क्षमा करे और माता-पिता और बेटे-बेटियों को अपने-अपने पारिवारिक कर्तव्यों को धार्मिकता के साथ निभाने की क्षमता प्रदान करे।
तथास्तु।
अगले भाग में पढ़िये
उपसंहार
To be continued ……..
आमीन।
ईश्वर की महिमा में जारी.......
ईश्वर की महिमा हो, ईश्वर को धन्यवाद।
"न-अधर्म" ही धर्म है।"
झारखण्ड! तुम्हें शांति मिले!!
भारत! तुम्हें शांति मिले!!
संपूर्ण विश्व को शांति!!