MARRIAGE

पवित्र विवाह एक ईश्वरीय बुलाहट

प्रकाशित 28/06/2020


ईश्वर की सृष्टि के पवित्र कार्य में हाथ बंटाने के लिए विवाह एक ईश्वरीय बुलाहट है।


ईसा मसीह के पालक पिता, यूसुफ और उनकी कुँवारी माता, मरियम के पवित्र विवाह को समझने का प्रयास करते हैं। जोसेफ की मंगनी मरियम से हुई थी; जैसा कि धर्म ग्रंथ में लिखा है:


छठे महीने स्वर्गदूत गब्रिएल, ईश्वर की ओर से, गलीलिया के नाजरेथ नामक नगर में एक कुँवारी के पास भेजा गया, जिसकी मँगनी दाऊद के घराने के यूसुफ नामक पुरूष से हुई थी, और उस कुँवारी का नाम मरियम था। लूकस 1: 26-27


प्रभु के उपरोक्त वचन में ईसा मसीह की होने वाली माता, मरियम, को दो बार कुँवारी बताया गया है, जो इस बात को बिल्कुल प्रमाणित करता है कि मरियम अपनी मंगनी होने के बावजूद अपने घर में अकेले है। यूसुफ और मरियम दोनों इस बात को जानते हैं कि जब तक कि जब तक वे विवाह के पवित्र बंधन में नहीं बंध जाते हैं, उन्हें अकेले-अकेले रहना है। प्रभु का उपरोक्त पवित्र वचन यूसुफ और मरियम दोनों की पवित्रता, सयंम और अकेलेपन का प्रमाण है।


खेद की बात है कि यूसुफ और मरियम के सयंम का सर्वोत्तम उदाहरण होने के बावजूद आज हमारे समाज में सयंम की कमी हैं। मंगनी के बाद कितने तो अपने को पति-पत्नी ही समझने लगते हैं; और कितने ही धोखा के शिकार हैं। सावधनी बरतने वाली बात यह है कि आज तक कितने ही मंगनी टूट चूके हैं।


मंगनी होन के बाद यूसुफ और मरियम दोनों अपने-अपने विवाह के इंतजार में अकेले दूर-दूर रह रहे थे। जब स्वर्गदूत गब्रिएल ने मरियम के गर्भवती होने की बात कही, तो मरियम ने अपनी शुद्धता का परिचय दिया; जैसा कि धर्म ग्रंथ में लिखा है:


पर मरियम ने स्वर्गदूत से कहा, “यह कैसे हो सकता है? मेरा तो पुरूष से संसर्ग नहीं है।“ लूकस 1: 34


मरियम की धार्मिकता को देखिए! मंगनी होने के बाद भी अकेली; घुमना-फिरना, चैट-वैट नहीं। मरियम अपनी पवित्रता और शुद्धता के कारण ईश्वर की असीम कृपा से पवित्र आत्मा से (बिना पुरूष से संसर्ग) गर्भवती हुई; जैसा कि धर्म ग्रंथ में लिखा है:


स्वर्गदूत ने उत्तर दिया, “पवित्र आत्मा आप पर उतरेगा और सर्वोच्च प्रभु की शक्ति की छाया आप पर पडेगी। इसलिए जो आप से उत्पन्न होंगे, वे पवित्र होंगे और ईश्वर के पुत्र कहलायेंगे। लूकस 1: 35


जब यूसुफ को मरियम के गर्भधारण का पता चला, तो वह उसे बदनामी के ड़र से त्यागने की सोच रहा था; जैसा कि धर्म ग्रंथ में लिखा है:


ईसा मसीह का जन्म इस प्रकार हुआ। उनकी माता मरियम की मंगनी युसूफ से हुई थी, परंतु ऐसा हुआ कि उनके एक साथ रहने से पहले ही मरियम पवित्र आत्मा से गर्भवती हो गई। उसका पति युसूफ चुपके से उसका परित्याग करने की सोच रहा था क्योंकि वह धर्मी था और मरियम को बदनाम नहीं करना चाहता था। वह इस पर विचार कर ही रहा था कि उसे स्वपन में प्रभु का दूत यह कहते दिखाई दिया, “युसूफ! दाऊद की संतान! अपनी पत्नी मरियम को अपने यहां लाने से नहीं डरें, क्योंकि उनके जो गर्भ हैं, वह पवित्र आत्मा से हैं। वे पुत्र प्रसव करेंगी और आप उनका नाम की ईसा रखेंगे, क्योंकि वे अपने लोगों को उनके पापों से मुक्त करेंगा।“ संत मत्ती 1 : 18-21


युसूफ प्रभु के संदेश / बुलाहट को नींद में प्राप्त कर, उठ कर मरियम को अपने यहाँ ले आया। अर्थात जब रात में युसूफ शांत मन में था, तो उसने प्रभु से अपने विवाह के संदेश को पाया और प्रभु के अनुसार पवित्र परिवार का निर्माण किया, जहाँ ईसा मसीह (प्रेम दया क्षमा शांति करूणा सहनशीलता धैर्य और न्याय) का जन्म हुआ। यह इसलिए हुआ क्योंकि मरियम एवं युसूफ दोनों ही ईश्वर के अनुसार पवित्र जीवनशैली को जीते हुए घार्मिकता से परिपूर्ण जीवन व्यतीत करते रहे। इसलिए उन दोनों ने ही ईश्वर की पवित्र बुलाहट को पहचाना और विवाह के पवित्र बंधन में बंध कर ईसा मसीह के साथ पवित्र परिवार का निर्माण किया।


हमें भी सयंम भरा पवित्रता से परिपूर्ण जीवन जी कर ईश्वर की बुलाहट पर ध्यान देने की आवश्यकता है क्योंकि पवित्र विवाह का ईश्वर ही योजनाकार ओर आयोजक है। देखिए! कैसे उसने आदम-हेवा को पति-पत्नी के पवित्र बंधन में बांधा और कैसे यूसुफ-मरियम को पती-पत्नी के पवित्र बंधन में बांध दिया।


इसका अर्थ यह है कि प्रभु नर, और नर से नारी को बना कर उनके विवाह की योजना बनाता है और उसका आयोजन कर उसे परिपूर्णता तक ले जाना चाहता है। इसके लिए जरूरी यह है कि हम यूसुफ और मरियम के समान ईश्वर के द्वारा विवाह की पवित्र बुलाहट की आवाज को सुनने के लिए पवित्र (पाप रहित) और शांतिमय जीवन व्यतीत करें। अनवश्यक संसारिक जद्दोजहद से दूर शांतिमय जीवन यापन करने पर ही हम ईश्वर के संदेशों को यूसुफ और मरियम के समान अपने और अपने बच्चों के लिए प्राप्त कर पायेंगे। विवाह की पवित्र बुलाहट के साथ-साथ ईश्वर के तमाम संदेशों को पाने के लिए धार्मिकता जरूरी है। ईश्वर की नजर में धार्मिक वही है, जो अधर्म नहीं करता है। धार्मिकता ईसा मसीह की जीवनशैली के अनुसार जीवन यापन करने से अपने-आप प्राप्त होती है; जिसकी चर्चा आप मेरे तमाम लेखों में विस्तार पूर्वक पढ़ सकते हैं।


अगले भाग में पढ़िये
विवाह एक अटूट बंधन
To be continued ……..


आमीन।


ईश्वर की महिमा में जारी.......


ईश्वर की महिमा हो, ईश्वर को धन्यवाद।


"न-अधर्म" ही धर्म है।"


झारखण्ड! तुम्हें शांति मिले!!

भारत! तुम्हें शांति मिले!!

संपूर्ण विश्व को शांति!!