MARRIAGE

विवाह संस्कार का योजनाकर और आयोजक

प्रकाशित 27/06/2020


आइये, इस महत्वपूर्ण बिषय को एक कहानी के माध्यम से समझने का प्रयास करते हैं कि ईश्वर ही पवित्र विवाह के बंधन का योजनाकार और आयोजक हैं:


एक बार, एक परिवार में पहुँच कर उनके दरवाजे पर दस्तक दिया, तो दरवाजा खुलने पर मेरा भव्य स्वागत को देखकर मैं सोचने लगा कि क्या बात है; पहले कभी मेरा इतना भव्य स्वागत यहाँ नहीं हुआ! आज इन्हें हो क्या गया है! इस भव्य स्वागत का राज क्या है? मामला समझने में मुझे ज्यादा देर नहीं लगी, जब उस घर की माँ ने मुझसे अपने बेटे के विवाह के लिये लड़की खोजने में होने वाली परेशानियों का जिक्र करना शुरू किया और कहने लगी कि आप अपना बहुमूल्य समय आज हमारे परिवार को दें और हमारे परिवार के सभी लोगों को धर्म ग्रंथ के अनुसार विवाह के पवित्र बंधन को समझायें; हमारी प्रार्थना और तमाम प्रयासों के बावजूद हम बेटे के लिए उपयुक्त लड़की पाने में असमर्थ रहे हैं। शायद आपसे विावह के पवित्र बंधन के बिषय में सुनकर हमारी परेशानी दूर हो जाये!


मुझे इस परिवार में पवित्र विवाह और उससे संबंधी समस्या को समझाने का मौका पाकर प्रसन्नता हुई। मैं विवाह के पवित्र बंधन को धर्म गंथ के अनुसार उन्हें समझाना शुरू किया ही था कि किसी ने दरवाजे पर दस्तक दिया। मेरी बात सुनने वालों में से एक ने उठ कर दरवाजा खोला और दरवाजा पर खड़ी अधेड़ महिला को देख सभी लोग, जो मेरी बात सुन रहे थे, उठ कर उस अधेड़ महिला के स्वागत में लग गए। उस अधेड़ महिला का इतना जोरदार स्वागत किया जा रहा था कि उनके द्वारा किया गया मेरा भव्य स्वागत मुझे फीका लगने लगा। मेरे हाथ में चाय का प्याला धरा का धरा रह गया; और मैं सोच में पड़ गया कि अब इस महिला का इतने जोरदार स्वागत का क्या अर्थ है? इस सवाल का जवाब पाने में मुझे ज्यादा वक्त नहीं लगा, जब उस अधेड़ महिला ने स्वयं अपना मुँह खोला और कहा, “कौन तैयार हो गया है? किसका जोड़ी बैठान है, जो आप लोग मेरा इतना जोरदार स्वागत कर रहे हैं?” उन लोगों का ध्यान मेरी ओर से बिल्कुल ही हट गया; और एक बार के लिए मुझे लगा कि चुपचाप यहाँ से खिसक लेते हैं! फिर कुछ विचार कर मैं वहाँ डट गया और उनकी बातों को चुपचाप ध्यान सें सुनने लगा। उनका वार्तालाप आप भी सुनिये:


लड़का की माँ - बड़ा बेटा विवाह लायक हो गया है।
मिडियेटर - छोटा में देखे थे, लगभग 15-20 बर्ष पहले।
लड़का की माँ - अब तो 27 बर्ष का जवान हो गया है। 6 फीट का हठ्ठा-कठ्ठा, गठीला, न काला न गोरा - सांवला है। इंगलिश मिडियम, मिशन स्कूल में पढ़ा है।
मिडियेटर - क्या काम करता है?
लड़का की माँ - बैंक में पी0ओ0 ज्वाइन किया था। अब तो मैनेजर बन जायेगा। उसके लिए देखना है। है, कोई नजर में?
मिडियेटर - बहुत है! कैसा चाहिए?
लड़का की माँ - गोरा होना चाहिए, 6 फीट से कम, कम-से-कम साढ़े पाँच फीट, इंगलिश मिडियम, मिशन स्कूल में पढ़ी हो। शहरी होना चाहिए। देहाती बिल्कुल नहीं चलेगा। नौकरी वाली हो- कम-से-कम टीचर या बैंक क्लर्क, हाँ अफसर नहीं चलेगा क्योंकि दोनो में इगो प्रोबलेम होगा।
मिडियेटर - ठीक है। पूरा नोट कर लिए हैं और जैसे ही मिलेगा खबर करेंगे। मेरा मोबाईल न0 है?
लड़का की माँ - वही तो नहीं है। दे दीजिए अपना मोबाईल न0।


इतना सुनने के बाद मैं चाय का प्याला टेबल पर रख कर चुपचाप वहाँ से निकल लिया। वे सब इतना मगन थे कि उनमें से किसी को भी ऐहसास नहीं हुआ कि मैं वहां से निकल रहा हूँ।


थोड़ा सोचिए! कि यदि उस लड़के की पसली से प्रभु ने गाँव-देहात के एक किसान के यहाँ 5 फीट की सांवला लड़की को गढ़ा है, तो चिराग लेकर खोजने पर यदि उक्त बायोडाटा से मेल खाने वाली लड़की मिल भी जाती है, तो क्या उन दोनों में समनव्य बन पायेगा? क्या इनका पारिवारिक जीवन शांति में बीतेगा? क्या कार में ट्रक का चक्का फिट किया जा सकता है? यदि कार में ट्रक का चक्का किसी तरह फिट कर भी दिया जाय तो क्या वह चलने लायक होगा?


इसलिए विवाह के पवित्र बंधन के गंभीर मामले में ईश्वर पर भरोसा रखना जरूरी है; ईश्वर ही इसका योजनाकार और आयोजक हैं। जिस प्रकार से ईश्वर ने आदम के अनजाने में उसकी पसली से हेवा को गढ़ कर, कहीं दूर उसका परवरिश किया और उचित समय आने पर उसे आदम के पास लाकर, दोनों को विवाह के पवित्र बंधन में बांध दिया; आज भी वे ऐसा ही करते हैं- जरूरत है, उचित समय के इंतजार का। विवाह के गंभीर मामले में सयंम से इंतजार इसलिए भी जरूरी है क्योंकि इस संसार का नायक शैतान जिसे छूट मिला हुआ है- वह बेमेल जोड़ी लगाने में और अशांति फैलाने में माहिर है। हमें अपने पूर्वज, आदम से संयम बरतना सीखना चाहिए। वे दोनों अपने विवाह के उचित समय पूरा नहीं होने तक बिल्कुल अकेला थे; जैसा कि धर्म गंथ में लिखा है:


अकेला रहना मनुष्य के लिए अच्छा नहीं है। इसलिए मैं उसके लिए एक उपयुक्त सहयोगी बनाऊँगा। उत्पति ग्रंथ 2: 18


दुःख की बात है कि आज दूनियाँ में कितने ही सारे परिवार टूटे और बिखरे पड़े हैं। बहुत सारे लोग लिव-इन-रिलेशनशिप के तहत जीवन बसर कर रहें हैं, जो धर्म गंथ के अनुसार बिल्कुल ही अनुचित है। बहुत सारे पति-पत्नी तो एक साथ एक छत के नीचे रहने के बावजूद भी भीतर से ही टूटे हुए हैं। न जाने कितने तलाक के केस कोर्ट में दर्ज हैं और कितनों का तलाक हो चूका है। इतने सारे दुःख तकलीफ के बीच खुशी और आशा की बात यह है कि हम सब का सृष्टिकर्ता पिता परमेश्वर, बिगड़ी बनाने में माहिर (रिपेयर मास्टर) हैं। यदि हम अपनी तमाम दुर्बलताओं (गुनहों) के साथ पश्चतापी हृदय से उनके सामने प्रस्तुत हो जायेंगे, तो वे जरूर हमारी तमाम दुर्बलताओं को अपने ऊपर ले लेंगे; और हमें हमारी तमाम परेशानियों से मुक्त करेंगे; जैसा कि धर्म ग्रंथ में लिखा है:


“थके-मांदे और बोझ से दबे हुए लोगो! तुम सभी मेरे पास आओ। मैं तुम्हे विश्राम दूँगा। मेरा जुआ अपने ऊपर ले लो और मुझ से सीखो। मैं स्वभाव से नम्र और विनीत हूँ। इस तरह तुम अपनी आत्मा के लिए शांति पाओगे, क्योंकि मेरा जुआ सहज है ओर मेरा बोझ हल्का।“ मत्ती 11: 28-29


प्रभु के समान विनम्र बनने के लिए हमें अपनी दुर्बलताओं (कठोरता) को त्यागना पड़ेगा। बिना अपनी कमजोरियों को छोड़े, कौन अपने पिता ईश्वर के समान दीन-हीन और पवित्र जीवन जी सकता है। जहाँ असल विनम्रता है, वहाँ प्रभु हैं। ईसा मसीह की जीवनशैली को जीने वालों के जीवन में ईश्वर की योजनाएं उचित समय पर असानी से पूरी होती जाती है।
तथास्तु।


अगले भाग में पढ़िये
पवित्र विवाह एक ईश्वरीय बुलाहट
To be continued ……..


आमीन।


ईश्वर की महिमा में जारी.......


ईश्वर की महिमा हो, ईश्वर को धन्यवाद।


"न-अधर्म" ही धर्म है।"


झारखण्ड! तुम्हें शांति मिले!!

भारत! तुम्हें शांति मिले!!

संपूर्ण विश्व को शांति!!