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हमारे लाईफ-स्टाइल से ईश्वर पीड़ित

प्रकाशित 16/07/2023 - 18/07/2023


16/07/2023


यदि कोई सबसे ज्यादा दुखित और पीड़ित है, तो वह हमारे सृष्टिकर्ता ईश्वर ही हैं। कारण कि उन्होंने जिनकी सृष्टि सीधे रास्ते पर चलने के लिए किए हैं-


उन सबों को, जो मेरे कहलाते हैं, जिनकी सृष्टि मैंने अपनी महिमा के लिए की है, जिन्हें मैंने गढ़ा और बनाया है। नबी इसायाह का ग्रंथ 43 : 7


वे आदम-हेवा के समय से उनकी इच्छा के उलट टेढ़े-मेढ़े रास्तों पर पतझड़ के पतों की तरह लगातार झड़ रहे‌ हैं। संसारिक वासनाओं की आबोहवा में इतनी तीव्रता है कि वह सब कुछ बहा कर अपने साथ ले जाने को उतारू है- जिसकी तीव्रता की चपेट में मानवजाति बड़ी ही आसानी से फंस कर टेढ़े मेढ़े रास्ते पर चल पड़ती है-


चौड़ा है वह फाटक और विस्तृत है वह मार्ग, जो विनाश की ओर ले जाता है। उस पर चलने वालों की संख्या बड़ी है। संत मत्ती 7 : 13 वचनांश


इसलिए योहन चौड़े मार्ग पर चलने वाले बहुसंख्यको से उपवास और परहेज के द्वारा जीवन के सीधे मार्ग पर चलने का आह्वान करते हैं-


निर्जन प्रदेश में पुकारने वाले की आवाज- प्रभु का मार्ग तैयार करो; उसके पथ सीधे कर दो। संत लूकस 3 : 4 वचनांश


बिल्कुल यही आदेश ईसा मसीह भी देते हैं -


संकरे द्वार से प्रवेश करो। चौड़ा है वह फाटक और विस्तृत है वह मार्ग, जो विनाश की ओर ले जाता है। उस पर चलने वालों की संख्या बड़ी है। किंतु साकरा है वह द्वार और संकीर्ण है वह मार्ग, जो जीवन की ओर ले जाता है। जो उसे पाते हैं, उनकी संख्या थोड़ी है। संत मत्ती 7 : 13-14


ईसा मसीह पूरा हिसाब कर बतला रहे हैं कि टेढ़े मेढ़े रास्ते का उपवास और परहेज (त्याग) करने वालों की संख्या नगण्य है; जबकि सीधे रास्ते का उपवास और परहेज (त्याग) करने वालों की संख्या बहुत ज्यादा है। हम किधर है? चौड़े मार्ग पर समेट लेने वाली आंधी और तूफान (शैतान) को शिकस्त दे कर ही संकीर्ण मार्ग (सत्य की राह) पर चला जा सकता है-


परंतु प्रार्थना तथा उपवास के सिवा किसी और उपाय से अपदूतों की यह जाति नहीं निकाली जा सकती। संत मत्ती 17 : 21


यही कारण है कि पेत्रुस भी बहुसंख्यको से उपवास और प्रार्थना का आह्वान करते हैं क्योंकि यदि कोई निरंतरता से उपवास और प्रार्थना नहीं करेगा तो वह बड़ी ही आसानी से बहुसंख्यको की आबादी बढ़ायेगा-


आप संयम रखें, और जागते रहे! आपका शत्रु, शैतान, दहाड़ते हुए सिंह की तरह विचारता है और ढूंढता रहता है कि किसे फाड़ खाएं। संत पेत्रुस का पहला पत्र 5 : 8


संयम और जागने शब्दों से उनका तात्पर्य शत्रु, शैतान को शिकस्त देने की तैयारी से है, जो उपवास और प्रार्थना का पर्यायवाची है, जिसके द्वारा कोई सीधे पथ पर अग्रसर हो कर अपने आप को ईश्वर के हाथों सौंप सकता है-


आप लोग ईश्वर के अधीन रहें। शैतान का सामना करें और वह आपके पास से भाग जाएगा। संत यकूब का पत्र 4 : 7


इसलिए जिस अनुपात में हम चौड़े मार्ग का उपवास और परहेज (त्याग) करेंगे, ठीक उसी अनुपात में ईश्वर का दुःख दर्द कम होगा और उनकी भी महिमा बढ़ेगी; इसलिए योहन कहते हैं-


यह उचित है कि वे बढ़ते जाएं और मैं घटता जाऊं। संत योहन 3 : 10


18/07/2023


कोई कैसे अपने पिता को, अपने ईश्वर को दुःख देकर खुशी हासिल कर सकता है? क्या उड़ाऊ पुत्र की खुशी, कलह में नहीं बदल गई? नश्वर शरीर के खातिर अपने पिता की आत्मा को दुख पहुंचाना कितना उचित है! नश्वर शरीर को टेढ़े मेढ़े, चौड़े रास्ते पर ले जाने वाला हमारा शत्रु, शैतान, इस संसार का नायक है; वह क्षणिक सुख दे कर मनुष्यों का अनंत कालीन सुख-चैन छीन लेने का कवायद करता है। क्षणिक सुख-चैन भोग-विलास की प्राप्ति के लिए टेढ़े मेढ़े चौड़े सरल मार्ग पर भटक हुए लोगों से प्रभु ईसा मसीह कहते हैं -


मनुष्य को इससे क्या लाभ यदि वह सारा संसार प्राप्त कर ले, लेकिन अपना जीवन ही गवां दे? अपने जीवन के बदले मनुष्य दे ही क्या सकता है? संत मत्ती 16 : 26


ईश्वर ने हमारे जीवन को बहुमूल्य घोषित किए हैं। मनुष्य ईश्वर नजरों में मूल्यवान हैं। क्या आप जानते हैं कि मानव जीवन को मूल्यवान घोषित करने के पीछे कारण क्या है? बहुत ही सरल सा उत्तर है कि उन्होंने सारी सृष्टि में सिर्फ मानव जाति को ही अपने सामान बनाएं हैं; बिल्कुल अपने सामान। क्या आप यह जानते हैं कि कैसे मनुष्य उनके सदृश्य है? इस सवाल का जवाब पाने के लिए यह समझना जरूरी है कि जब ईश्वर ने आदम-हेवा की सृष्टि की, उस वक्त ईश्वर का दृश्य कैसा था! लिखा है -


पृथ्वी उजाड़ और सुनसान थी। अथाह गर्त पर अंधकार छाया हुआ था और ईश्वर का आत्मा सागर पर विचरता था। उत्पत्ति ग्रंथ 1 : 2


तो ईश्वर आत्मा के रूप हैं इसलिए मनुष्य को अपना स्वरूप देने के लिए उन्होंने मनुष्य को भी अपने सदृश्य आत्मा प्रदान किए हैं। इसलिए वे कतई नहीं चाहते हैं कि मनुष्य उनके द्वारा प्रदत, उनके सदृश्य अपनी आत्मा को टेढ़े मेढ़े चौड़े रास्ते पर शरीर की वासनाओं के कारण नुकसान पहुंचाए; क्योंकि लिखा है -


उन सबों को, जो मेरे कहलाते हैं, जिनकी सृष्टि मैंने अपनी महिमा के लिए की है, जिन्हें मैंने गढ़ा और बनाया है। नबी इसायाह का ग्रंथ 43 : 7


ईश्वर की महिमा मानव जाति से, ईश्वर की पवित्र इच्छा के अनुसार, तभी संभव है, जब हम अपने बहुमूल्य जीवन का मूल्य समझ कर ईश्वर के सदृश्य अपनी आत्मा को ईश्वर के सदृश्य पवित्र बनाए रखने के लिए टेढ़े मेढ़े चौड़े रास्ते का निरंतरता के साथ उपवास और परहेज कर हमारे सृष्टिकर्ता और हमारे शत्रु, शैतान को परास्त करते हैं।


परंतु प्रार्थना तथा उपवास के सिवा किसी और उपाय से अपदूतों की यह जाति नहीं निकाली जा सकती। संत मत्ती 17 : 21


ईश्वर को दुःख है कि अपने बहुमूल्य जीवन का मूल्य नहीं समझने वालों की जनसंख्या बहुत बड़ी है-


चौड़ा है वह फाटक और विस्तृत है वह मार्ग, जो विनाश की ओर ले जाता है। उस पर चलने वालों की संख्या बड़ी है। संत मत्ती 7 : 13 वचनांश


टेढ़े मेढे चौड़े मार्ग पर चलने वाली थकी-हारी बहुल आत्माओं को प्रभु संबोधित करते हुए कहते हैं-


"थके-मांदे और बोझ से दबे हुए लोगों! तुम सभी मेरे पास आओ। मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। मेरा जुआ अपने ऊपर ले लो और मुझसे सीखो। मैं स्वभाव से नम्र और विनीत हूं। इस तरह तुम अपनी आत्मा के लिए शांति पाओगे, क्योंकि मेरा जुआ सहज और मेरा बोझ हल्का।" संत मत्ती 11 : 28-30


चूंकि उन्होंने हमें अपने सदृश्य आत्मा प्रदान किए है इसलिए वे चाहते हैं कि हम अपनी आत्मा को बोझिल करने वाले टेढ़े मेढ़े के मार्ग का उपवास और परहेज कर अपनी आत्मा को हल्का करें और उनके संकीर्ण मार्ग पर चलकर अपनी आत्मा को ईश्वर की पवित्रता के अनुसार पवित्र कर शांतिमय जीवन जिएं। यही कारण है कि योहन शांतिमय पवित्र जीवन का आह्वान करते हैं -


निर्जन प्रदेश में पुकारने वाले की आवाज- प्रभु का मार्ग तैयार करो; उसके पथ सीधे कर दो। संत लूकस 3 : 4 वचनांश


ताकि जितनी भारी संख्या में लोगों की टेढ़े मेढ़े चौड़े रास्ते से संकीर्ण रास्ते पर वापसी करेंगे, ठीक उसी अनुपात में ईश्वर का दुःख दर्द कम होगा और उनकी महिमा बढ़ेगी; इसलिए योहन कहते हैं-


यह उचित है कि वे बढ़ते जाएं और मैं घटता जाऊं। संत योहन 3 : 10


ईश्वर की महिमा हो, ईश्वर को धन्यवाद।


आमीन।


"न अधर्म" ही धर्म है।"


झारखण्ड! तुम्हें शांति मिले!!

भारत! तुम्हें शांति मिले!!

संपूर्ण विश्व को शांति!!

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