प्रकाशित 15/07/2023
ईसा मसीह मुक्तिदाता हैं। हर मनुष्य को मुक्त करने का प्रयास करते हैं। वे उन्हें मुक्त करते हैं, जो मुक्ति चाहता है। जो मुक्त होना चाहता है, उसे ईसा मसीह, ईश्वर, से हर संभव मदद मिलेगी। जो टेढ़े मेढ़े रास्ते का उपवास और परहेज करेगा, उसे हर संभव ईसा मसीह, ईश्वर, से मदद मिलेगी। जो नबियों द्वारा ईश्वर के सीधे मार्ग पर चलने की आह्वान को सुनकर कुमार्ग का उपवास और परहेज शुरू करता है, उसे ईसा मसीह, ईश्वर, का हर संभव मदद मिलेगा। जो अधर्म को छोड़कर धर्म की ओर अग्रसर होता है, उसे ईसा मसीह, ईश्वर, का हर संभव मदद मिलेगा। जो असत्य को छोड़ कर सत्य धारण करना चाहता है, उसे ईसा, ईश्वर, से मसीह हर संभव मदद मिलेगी-
जो खो गया था उसी को बचाने के लिए मानव पुत्र आया है। तुम्हारा क्या विचार है- यदि किसी के एक सौ भेड़े हो और उनमें से एक भी भटक जाए, तो क्या वह उन निन्यानबे भेड़ों को पहाड़ी पर छोड़कर उस भटकी हुई को खोजने नहीं जाएगा? और यदि वह उसे पाए, तो मैं विश्वास दिलाता हूं कि उसे उन निन्यानबे की अपेक्षा, जो भटकी की नहीं थी, उस भेड़ के कारण अधिक आनंद होगा। इसी तरह मेरा स्वर्गीय पिता नहीं चाहता कि इन नन्हों में से एक भी हो जाए। संत मत्ती 18 : 11 - 14
लेकिन बिड़ंबना यह है कि बुरा डाकू छोड़ दिया गया, जबकि भला डाकू उठा लिया गया। जो टेढ़ा मेढ़ा रास्ता छोड़ना चाहेगा, वह बचा लिया जाएगा; लेकिन जो टेढ़ा मेढ़ा मेरा रास्ता छोड़ना नहीं चाहेगा वह कैसे बचेगा? जो ईश्वर की महिमा करना करेगा, ईश्वर की अनंत कालीन महिमा में सम्मिलित किया जाएगा; लेकिन जो ईश्वर की महिमा नहीं करना चाहेगा, उसे ईश्वर की अनंत कालीन महिमा में सम्मिलित करने का प्रयास किया जाएगा और वह ईश्वर की अनंत कालीन महिमा में सम्मिलित किया जाएगा, बर्शते वह ईश्वर की महिमा में सम्मिलित होने के लिए इच्छा जाहिर करे- भला डाकू इसका जीवंत उदाहरण है।
मानव पुत्र के आने के बावजूद बहुत सारे मुक्त नहीं हो पाए हैं क्योंकि वे मुक्ति नहीं चाहते हैं- बुरा डाकू इसका दुखद उदाहरण है।
यदि हम ईसा मसीह की मुक्तिदाता की छवि के कारण यह समझते हैं कि हम चाहे जो भी करें जितना भी टेढ़े मेढ़े रास्ते पर चलें, हमारे मुक्तिदाता ईसा मसीह हमें बचा लेंगे, तो हमारी यह धारणा बिल्कुल गलत है-
मैं तुमसे करता हूं, उस रात दो एक खाट पर होंगे- एक उठा लिया जाएगा और दूसरा छोड़ दिया जाएगा। दो स्त्रियां एक साथ चक्की पीसती होंगी- एक उठा ली जाएगी और दूसरी छोड़ दी जाएगी। संत लूकस 17 : 34-35
इसलिए योहन निर्जन प्रदेश में भटकने वाली भेड़ों का आव्हान है -
निर्जन प्रदेश में पुकारने वाले की आवाज- प्रभु का मार्ग तैयार करो; उसके पथ सीधे कर दो। संत लूकस 3 : 4 वचनांश
क्योंकि
उन सबों को, जो मेरे कहलाते हैं, जिनकी सृष्टि मैंने अपनी महिमा के लिए की है, जिन्हें मैंने गढ़ा और बनाया है। नबी इसायाह का ग्रंथ 43 : 7
इसलिए हम जिस अनुपात में टेढ़े मेढ़े रास्ते का उपवास और परहेज करेंगे , ठीक उसी अनुपात में ईश्वर की महिमा बढ़ाएंगे; इसलिए योहन कहते हैं-
यह उचित है कि वे बढ़ते जाएं और मैं घटता जाऊं। संत योहन 3 : 10
ईश्वर की महिमा हो, ईश्वर को धन्यवाद।
आमीन।
"न अधर्म" ही धर्म है।"
झारखण्ड! तुम्हें शांति मिले!!
भारत! तुम्हें शांति मिले!!
संपूर्ण विश्व को शांति!!