प्रकाशित 28/06/2023
योहन बपतिस्ता यर्दन के आस-पास के इलाकों में पाप क्षमा के लिए पश्चताप का बपतिस्मा जल से देते थे। उनके बिषय में नबी इसायाह के ग्रंथ में लिखा है-
निर्जन प्रदेश में पुकारने वाले की आवाज- प्रभु का मार्ग तैयार करो; उसके पथ सीधे कर दो। संत लूकस 3 : 4 वचनांश
योहन निर्जन प्रदेश में पुकारने वाली की आवाज अर्थात ईश्वर की आवाज को सुनकर निर्जन प्रदेश को बचाने वाले की आवाज बन गए; निर्जन प्रदेश को बदलने वाली आवाज बन गए। कैसे? तो समझना यह होगा कि प्रदेश निर्जन का मतलब क्या है? निर्जन प्रदेश का अर्थ है उजाड़ सुनसान वीरान बाबुल की कटीली झाड़ियां कंकड़ीली पथरीली भूमि सूखाग्रस्त जहां जीवन का नामोनिशान नहीं है; चारों तरफ हैरानी और वीरानी छाई हुई है!!! आध्यात्मिक तौर पर निर्जन प्रदेश एक ऐसा प्रदेश है, जहां प्रेम दया क्षमा शांति करुणा सहनशीलता धैर्य नदारद हो, निर्जन प्रदेश के जैसा हो गया है; जहां ईर्ष्या है द्वेष है घमंड है पाखंड है दिखावा है लालच है व्यभिचार है इत्यादि इत्यादि। ऐसे ही निर्जन प्रदेश में ईश्वर की आवाज को सुनकर योहन ईश्वर की आवाज बन गए और मानव जीवन के टेढ़े मेढ़े रास्ते को सीधा करने और ईश्वर और मनुष्य के बीच की खाई को पश्चाताप का बपतिस्मा का उपदेश देकर भरने लग गए और निर्जन प्रदेश में प्रेम दया क्षमा शांति करूणा सहनशीलता धैर्य की हरियाली भरने लगे। यह वही योहन हैं जिन्होंने अपनी माता के गर्भ में रहते हुए, मरियम के गर्भ में अपने घर पधारे, ईसा मसीह की उपस्थिति को पहचान कर खुशी के मारे उछल पड़े। इन दोनों की जोड़ी अपनी-अपनी माता के गर्भ में रखते हुए ही शुरू हो गई।
ज्यों ही एलिजाबेथ ने मरियम का अभिवादन सुना, बच्चा उसके गर्भ में उछल पड़ा और एलिजाबेथ पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो गई। संत लूकस 1 : 41
हममें से बहुतों ने बपतिस्मा लिया है, क्या हमारे जीवन का टेढ़ा मेढ़ा रास्ता सीधा हो चुका है? क्या हमारे और ईश्वर के बीच की खाई समाप्त हो गई है? क्या हमारी और ईश्वर की जोड़ी बन पाई है? क्या हम दूसरों के जीवन के टेढ़े मेढ़े रास्ते को सीधा करने और ईश्वर और उनके बीच की खाई को दूर करने में ईश्वर के काम आते हैं? यह सवाल जरूरी है क्योंकि
अब से मैं तुम्हें सेवक नहीं कहूंगा। सेवक नहीं जानता है उसका स्वामी क्या करने वाला है। मैंने तुम्हें मित्र कहा है क्योंकि मैंने अपने पिता से जो कुछ सुना वह सब तुम्हें बता दिया है। संत योहन 15: 15
ईसा मसीह हम सबको अपना मित्र मानते हैं; हम सबसे जोड़ी जुमाना चाहते हैं और हम सबको अपने काम में लगाना चाहते हैं। क्या हम योहन की तरह ईसा मसीह को अपना जोड़ी बनाना चाहते हैं? यदि हम अपने और अपनों के लिए ईश्वर का मार्ग सीधा करना चाहते हैं, तो हमें योहन की तरह ईसा मसीह को पहचानने और उनसे जोड़ी जुमाने की जरूरत है।
ईश्वर की महिमा हो, ईश्वर को धन्यवाद।
आमीन।
"न अधर्म" ही धर्म है।"
झारखण्ड! तुम्हें शांति मिले!!
भारत! तुम्हें शांति मिले!!
संपूर्ण विश्व को शांति!!