प्रकाशित 26/06/2023
योहन के द्वारा ईश्वर की महिमा में सम्पन्न की जा रही जल का बपतिस्मा लेकर ईसा मसीह जल-का-बपतिस्मा को धर्मविधि घोषित कर उसपर स्वार्गिक मोहर जड़ दिए। यह इस बात का द्योतक है कि मनुष्यों द्वारा ईश्वर की महिमा में सम्पन्न होने वाली धर्म विधियों और धार्मिक कार्यक्रमों में ईसा मसीह आज भी उपस्थित होते हैं, बर्शते वे धर्मविधियां और धार्मिक कार्यक्रम -
(1) योहन की धर्मविधि की तरह मानव जीवन के टेढ़े मेढ़े रास्ते सीधे करने वाले हो एवं ईश्वर और मनुष्यों के बीच की खाई भरने वाला हो और
(2) योहन के चरित्र की तरह बिल्कुल दीनताई और निस्वार्थ भाव से संपन्न किया जा रहा है।
क्योंकि जहां दो या तीन मेरे नाम पर इकट्ठा होते हैं, वहां मैं उनके बीच उपस्थित रहता हूं। संत मत्ती 18 : 20
योहन की धर्मविधि में जमावड़ा सिर्फ और सिर्फ ईश्वर के नाम में अर्थात ईश्वर की महिमा में लगती थी; इसलिए ईसा मसीह वहां उपस्थित हुए और होते रहे। ईसा मसीह और योहन की जोड़ी के समान ही हम मनुष्यों को धर्मविधि एवं धार्मिक कार्यक्रम में इकट्ठा होना चाहिए और संपन्न करना चाहिए।
क्योंकि मुझसे अलग रहकर तुम कुछ भी नहीं कर सकते । संत योहन 15 : 5 वचनांश
ईश्वर की महिमा हो, ईश्वर को धन्यवाद।
आमीन।
"न अधर्म" ही धर्म है।"
झारखण्ड! तुम्हें शांति मिले!!
भारत! तुम्हें शांति मिले!!
संपूर्ण विश्व को शांति!!