प्रकाशित 24/06/2023
प्रेम करने का आदेश देने वाले ईसा मसीह के पास ईश्वर होने के बावजूद कोई घमंड नहीं है। ईसा मसीह प्रेम का अदि्वतीय नमूना प्रस्तुत करते हैं - वे ईश्वर हो कर भी बपतिस्मा लेने के लिए योहन (मनुष्य) के नीचे बड़ी ही शालीनता से खड़े हैं।
योहन जानते हैं कि जो उनसे नीचे बपतिस्मा लेने के लिए नम्रतापूर्वक खड़े हैं, वे उनसे उम्र में भले 6 महीने छोटे हैं लेकिन अवकात में अतुल्य हैं। इसलिए योहन यह नहीं चाहते हैं कि जो उनके नीचे शालीनता से खड़े हैं, वह उन्हें बपतिस्मा दे। इसलिए किसी प्रकार से इस अजीब सी हालात से बच निकलने के लिए वे ईसा से कहते हैं -
योहन यह कहते हुए उन्हें रोकना चाहा, "मुझे तो आपसे बपतिस्मा लेने की जरूरत है और आप मेरे पास आते हैं?" संत मत्ती 3 : 15
छोटे-बड़े से लेकर ईश्वर तक का सम्मान किसी से सीखना है, तो वह योहन और ईसा की जोड़ी हैं, जो यह बात सिखलाती है। ईसा मसीह जो शिक्षा देते हैं, वे स्वयं उस पर चलते भी हैं -
जो अपने को इस बालक जैसा छोटा समझता है वह स्वर्ग के राज्य में सबसे बड़ा है। संत मत्ती 18 : 4
मानव रूप में उपस्थित ईसा मसीह ने अपने आप को योहन के सामने बिल्कुल छोटा बना दिया। आज वे स्वर्ग में पिता के दाहिने विराजमान हैं।
योहन ने तो अपने से उम्र में छह महीना छोटे ईसा मसीह के लिए अपना सब कुछ लुटा दिया और ईसा से संतों का दर्जा पा लिया।
ईश्वर की महिमा हो, ईश्वर को धन्यवाद।
आमीन।
"न अधर्म" ही धर्म है।"
झारखण्ड! तुम्हें शांति मिले!!
भारत! तुम्हें शांति मिले!!
संपूर्ण विश्व को शांति!!